देश की नींव में हमारे वीर जवानों का बलिदान: पुलिस स्मृति दिवस पर अमित शाह ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि|
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर गृह मंत्री ने सुरक्षाकर्मियों के बलिदान को नमन किया और नक्सलवाद के खात्मे को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर आयोजित पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम के दौरान हुए समारोह को संबोधित किया।
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर आयोजित पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। नई दिल्ली स्थित इस स्मारक पर उन्होंने पुष्पांजलि चढ़ाकर देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की प्रहरी बनी पुलिस बल के सर्वोच्च बलिदान को याद किया और नमन किया। इस खास और गरिमामय मौके पर गृह मंत्री ने एक बाइक रैली को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आज का दिन उन सभी बहादुर पुलिसकर्मियों के त्याग को याद करने का है, जिन्होंने देश की आजादी के समय से लेकर अब तक लगातार भारत मां की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाई है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आजादी के बाद के लगभग आठ दशकों में भारत ने पूरी दुनिया के मंच पर जो सम्मानजनक और गौरवशाली स्थान हासिल किया है, उसकी मजबूत नींव में हमारे इन्हीं वीर जवानों का महान बलिदान छिपा हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर इन वीर पुरुषों और महिलाओं ने हमारी सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर न किया होता, तो आज हमारा देश जिस ऊंचाई पर खड़ा है, वहां पहुंचना सोचना भी मुश्किल होता।
अपने संबोधन में गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खात्मे को भारतीय पुलिस की एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 भारतीय पुलिस और देश की सुरक्षा के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 को हमारे देश को नक्सलवाद के अभिशाप से पूरी तरह मुक्ति मिल गई। उन्होंने याद दिलाया कि साल 1981 से ही नक्सलवाद ने देश के कई हिस्सों और जिलों को गहरे जख्म दिए थे, जिसकी वजह से बहुत बड़ी संख्या में हमारे सुरक्षाकर्मियों और आम निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस समस्या के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य में सुरक्षा बलों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा था। गृह मंत्री ने आधिकारिक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इस पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की भयंकर समस्या के कारण 13,700 से अधिक बेकसूर नागरिकों की जान गई, वहीं 3,600 बहादुर सुरक्षाकर्मियों के अभूतपूर्व बलिदान की बदौलत ही आज देश इस संकट से बाहर निकल पाया है। उन्होंने इन सभी शहीद जवानों के परिजनों के प्रति पूरे राष्ट्र की ओर से गहरा आभार व्यक्त किया।
गृह मंत्री ने 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाए जाने के ऐतिहासिक कारण के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के बेहद दुर्गम हॉट स्प्रिंग इलाके में सीआरपीएफ के 10 जाबांज़ जवानों ने चीनी सेना के भारी हमले का बिना डरे डटकर मुकाबला किया था और देश की रक्षा करते हुए अपनी आहुति दी थी। उन्होंने कहा कि जब हॉट स्प्रिंग की उस घटना का गहराई से अध्ययन किया जाता है, तो पता चलता है कि जब ऊंची पहाड़ियों पर संघर्ष करने का फैसला लिया गया होगा, तब उसका नतीजा पहले से तय था। इसके बावजूद उन अमर सपूतों ने यह दृढ़ संकल्प लिया था कि देश की एक इंच जमीन भी किसी विदेशी ताकत के हाथ में नहीं जाने देंगे। उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक इस संकल्प को निभाया और अमर बलिदान दिया। इसी ऐतिहासिक घटना और जवानों के शौर्य की याद में हर साल 21 अक्टूबर का दिन देशभर में पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इसके साथ ही गृह मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में इस राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया था। इस स्मारक को बनाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि यह आने वाली पीढ़ियों के पुलिसकर्मियों को देशसेवा की प्रेरणा देता रहे और उन्हें उनके कर्तव्यों के प्रति हमेशा सतर्क और जागरूक बनाए रखे। आज यह राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पूरे देश के नागरिकों के लिए श्रद्धा और सम्मान का एक बहुत बड़ा केंद्र बन चुका है। इस स्मारक पर अब तक देश सेवा में अपनी ड्यूटी के दौरान शहीद हुए 36,852 पुलिसकर्मियों को याद किया जाता रहा है और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। इस वर्ष भी 154 और बहादुर जवानों के नाम इस गर्वमयी सूची में जोड़े गए हैं। गृह मंत्री ने इन सभी शहीदों के नामों का उल्लेख करने के बाद हाथ जोड़कर उन्हें नमन किया और उनके अभूतपूर्व बलिदान के प्रति पूरे देश की कृतज्ञता प्रकट की।
अपने भाषण के अंत में गृह मंत्री ने देश के आम नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर सरकार की सभी प्रकार की सेवाओं की तुलना की जाए, तो पुलिस की सेवा सबसे कठिन और चुनौतीभरी है। देश के हर नागरिक के लिए हर त्यौहार खुशी का मौका होता है, लेकिन पुलिसकर्मी के लिए कोई त्यौहार नहीं होता। जिस दिन हम सब अपने परिवारों के साथ घर पर त्यौहार मना रहे होते हैं, उस दिन हमारा पुलिस का जवान सड़क और मौके पर तैनात होकर हमारी आंतरिक सुरक्षा, ट्रैफिक और लोगों की सलामती की चिंता करता है। अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और स्वर्ण काल अपने परिवार से दूर रहकर देश को समर्पित कर देना वास्तव में एक बहुत बड़ी राष्ट्र सेवा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
