असम, नागालैंड और केंद्र के बीच तेल अन्वेषण पर त्रिपक्षीय समझौता संपन्न, अमित शाह ने सुरक्षा व्यवस्था में ८० प्रतिशत सुधार का दावा किया।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्व क्षेत्र में स्थायी शांति और आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया है कि अगले साल तक एक या दो राज्यों को छोड़कर पूरे नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र से आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट यानी AFSPA को पूरी तरह से हटाया जा सकता है। यह घोषणा उस समय की गई जब नई दिल्ली में असम-नागालैंड सीमा पर विवादित क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण को लेकर एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच हुआ यह समझौता पिछले तीन दशकों से अधिक समय से अधिकार क्षेत्र के विवादों के कारण लंबित था। नई दिल्ली में आयोजित इस भव्य और औपचारिक कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने इसे उत्तर-पूर्व के समग्र विकास की दिशा में एक युगांतरकारी कदम बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज पूरा उत्तर-पूर्व 'राष्ट्र प्रथम' की मूल भावना के साथ तेजी से विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है और यह त्रिपक्षीय समझौता क्षेत्र की आर्थिक प्रगति के लिए असीम संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा।

अमित शाह ने सीमावर्ती विवादित इलाकों (DAB) में तेल और खनिजों की खोज पर हुए इस समझौते को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम बताया। वैश्विक संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में जब भारत और पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय में यह कदम भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों में आत्मनिर्भर बनाने में गेम-चेंजर साबित होगा। आंकड़ों को साझा करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि इस एकल समझौते के माध्यम से विवादित क्षेत्र से तेल उत्पादन की मौजूदा क्षमता को १०००-१५०० बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर सीधे १० गुना किया जा सकता है। इस पूरे बेल्ट से १५,००० करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कच्चे तेल के दोहन की प्रबल संभावना है, जिससे भारत की विदेशी तेल निर्भरता और वित्तीय बोझ काफी हद तक कम होगा।

इस ऐतिहासिक अवसर पर गृह मंत्री ने उत्तर-पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था में आए क्रांतिकारी सुधारों का आधिकारिक ब्यौरा भी पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वर्ष २०१९ से अब तक इस क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक शांति समझौतों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा चुका है। इन ठोस नीतिगत प्रयासों का परिणाम यह हुआ है कि नॉर्थ-ईस्ट में हिंसक उग्रवादी घटनाओं में ८० प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों से AFSPA के दायरे में आने वाले कुल भौगोलिक क्षेत्र को भी ८० प्रतिशत तक समेटा जा चुका है, जिसे अब अगले वर्ष तक लगभग शून्य करने का लक्ष्य है। यह समझौता और सुरक्षा ढांचा आने वाले दिनों में पूर्वोत्तर भारत को देश के मुख्य आर्थिक इंजन के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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