भारत की न्यायिक प्रणाली में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जब न्यायालय को निष्पक्ष कानूनी मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण कड़ी है 'एमिकस क्यूरी' (Amicus Curiae), जिसका अर्थ है 'न्यायालय का मित्र'। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के संदर्भ में एमिकस क्यूरी की नियुक्ति कर इस वैधानिक व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। यह व्यवस्था तब प्रभावी की गई जब संबंधित पक्षों द्वारा अदालती कार्यवाही के बहिष्कार जैसी स्थितियां उत्पन्न हुईं।

एमिकस क्यूरी वास्तव में कोई पक्षकार नहीं होता, बल्कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यक्ति या संस्था होती है, जिसे न्यायालय जटिल मामलों में सहायता के लिए नियुक्त करता है। लैटिन मूल के इस शब्द का उपयोग भारतीय न्यायपालिका में तब किया जाता है जब मामले संवैधानिक हों, समाज के व्यापक हित जुड़े हों, या जब न्यायालय को किसी विशेष तकनीकी या वैज्ञानिक विश्लेषण की आवश्यकता होती है। भारतीय संविधान में इसका प्रत्यक्ष उल्लेख न होने के बावजूद, अनुच्छेद 32 और 226 के तहत न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों के माध्यम से इसकी नियुक्ति की जाती है।

ऐतिहासिक रूप से 'विशाखा बनाम राजस्थान राज्य' जैसे महत्वपूर्ण मामलों में एमिकस क्यूरी की भूमिका निर्णायक रही है, जहाँ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ दिशा-निर्देश तैयार करने में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। इसी तरह एम.सी. मेहता मामले में पर्यावरण संरक्षण और अयोध्या भूमि विवाद जैसे संवेदनशील प्रकरणों में साक्ष्यों के निष्पक्ष विश्लेषण के लिए इस व्यवस्था का सहारा लिया गया। एमिकस क्यूरी का मुख्य कर्तव्य न्यायालय को कानूनी शोध प्रदान करना और एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है ताकि न्याय की पारदर्शिता बनी रहे।

दिल्ली हाईकोर्ट का ताजा निर्णय यह स्पष्ट करता है कि एमिकस क्यूरी न्यायिक सक्रियता का एक प्रभावी उपकरण है। जब कानूनी पेचीदगियां और राजनीतिक संवेदनशीलता एक साथ खड़ी हों, तब 'न्यायालय का मित्र' न्याय सुनिश्चित करने में एक सेतु का कार्य करता है। यह न केवल न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता को बढ़ाता है, बल्कि लोकतंत्र में कानून के शासन के प्रति विश्वास को भी सुदृढ़ करता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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