संविधान के शिल्पी को राष्ट्र का नमन: बाबासाहेब की 136वीं जयंती पर भावुक हुआ देश।
संविधान निर्माता बाबासाहेब की 136वीं जयंती पर राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों का आयोजन, प्रधानमंत्री ने संसद में पुष्पांजलि अर्पित कर याद किया योगदान।

डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती के उपलक्ष्य में उनकी विरासत और भारतीय संविधान में उनके अमूल्य योगदान को याद किया गया।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 136वीं जयंती: राष्ट्र के महान शिल्पी की विरासत को देश का नमन
भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने वाले और सामाजिक समरसता के पुरोधा डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की 136वीं जयंती के अवसर पर आज पूरा राष्ट्र उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है। आज का दिन केवल एक महान व्यक्तित्व का जन्मदिवस नहीं है, बल्कि उस संकल्प के पुनर्मूल्यांकन का दिन है, जिसने भारत को एक न्यायपूर्ण और समावेशी संविधान दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश की ओर से अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, जिसके बाद देशभर के अलग-अलग कोनों में उत्सव और सम्मान की लहर दौड़ पड़ी।
बाबासाहेब का जीवन उस अदम्य साहस की कहानी है, जिसने सदियों पुरानी सामाजिक जंजीरों को तोड़कर ज्ञान और समानता का मार्ग प्रशस्त किया। 14 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में चैत्य भूमि से लेकर संसद तक और गांव की चौपालों से लेकर डिजिटल मंचों तक, विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि बाबासाहेब का संघर्ष किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए था जो शोषण का शिकार था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का आत्मनिर्भर भारत, अंबेडकर के 'आर्थिक सशक्तीकरण' और 'शिक्षित बनो' के मंत्र को ही आत्मसात कर आगे बढ़ रहा है।
संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. अंबेडकर का योगदान अद्वितीय है। उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान को गढ़ते समय भारत की भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का पूरा ध्यान रखा। कानून मंत्री और एक महान अर्थशास्त्री के रूप में उन्होंने आरबीआई की स्थापना से लेकर श्रमिक कानूनों में सुधार तक जो रूपरेखा तैयार की थी, वह आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। जयंती समारोहों के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक झांकियां, संगोष्ठियां और मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह आयोजित किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि बाबासाहेब के विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
विशेष रूप से, इस वर्ष की जयंती पर सरकारी संस्थानों और शैक्षणिक केंद्रों में बाबासाहेब के 'लोकतांत्रिक मूल्यों' पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखें तो सरकार ने इस अवसर पर कई लोक कल्याणकारी योजनाओं को बाबासाहेब की दृष्टि से जोड़ते हुए उनकी पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया। सुरक्षा व्यवस्था और जनभागीदारी के बीच देश के कोने-कोने में 'जय भीम' के उद्घोष के साथ डॉ. अंबेडकर की विरासत को उत्सव के रूप में मनाया गया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती हमें याद दिलाती है कि स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब वह समानता और बंधुत्व के साथ हो। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्र ने आज यह संकल्प लिया है कि संविधान की मूल भावना को सुरक्षित रखते हुए एक विकसित भारत का निर्माण किया जाएगा, जो बाबासाहेब के सपनों का भारत होगा। उनकी शिक्षाएं और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकाश स्तंभ का कार्य करती रहेंगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
