जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज एक बार फिर पूरी तरह से बिगड़ गया है, जिसके चलते प्रशासन ने एहतियातन एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा आने वाले दिनों में भारी बारिश की आशंका जताए जाने के बाद, अधिकारियों ने शनिवार को अमरनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 10 से 12 अगस्त के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बेहद खराब रह सकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए किसी भी नए जत्थे को जम्मू से घाटी की ओर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। इस प्रशासनिक फैसले से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र, श्रीनगर के वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले एक-दो दिनों में दक्षिण कश्मीर, पीर पंजाल क्षेत्र और जम्मू संभाग के कुछ चुनिंदा हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना है। वहीं, उत्तर और मध्य कश्मीर में भी हल्की बारिश के आसार बने हुए हैं। हालांकि, मौसम विभाग की मुख्य चिंता 10 अगस्त के बाद सक्रिय होने वाले एक नए वेदर सिस्टम पर टिकी हुई है। इस नए सिस्टम के प्रभाव से 10 से 12 अगस्त के बीच बारिश की गतिविधियों में भारी तेजी आने की आशंका है, जिसके मध्यनजर यह एहतियाती कदम उठाया गया है।

प्रशासन की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शनिवार को जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से किसी भी नए तीर्थयात्री जत्थे को घाटी की ओर रवाना होने की इजाजत नहीं दी गई। अधिकारी लगातार मौसम की स्थिति और हालात का बारीकी से जायजा ले रहे हैं। इसके साथ ही, जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे की स्थिति पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, क्योंकि यही वह मुख्य मार्ग है जिसका उपयोग तीर्थयात्री यात्रा के बेस कैंप तक पहुंचने के लिए करते हैं। यह पवित्र यात्रा इस वर्ष 3 जुलाई को शुरू हुई थी और परंपरा के अनुसार 57 दिनों का सफर तय करते हुए 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के पावन पर्व पर संपन्न होगी।

वर्तमान में दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप रूट से किसी भी यात्री को यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है, क्योंकि उस ट्रैक पर मरम्मत और रखरखाव का कार्य तेजी से चल रहा है। इस समय तीर्थयात्री उत्तर कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित बालटाल बेस कैंप से होकर अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं। इससे पहले, अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए जाने के सात साल पूरे होने पर सुरक्षा कारणों के चलते यात्रा को एक दिन के लिए रोका गया था, जिसे बाद में गुरुवार को दोबारा सुचारू रूप से शुरू किया गया था। उस दौरान 1,801 तीर्थयात्रियों का 28वां नया जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 2:45 बजे जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ था। इस जत्थे में 1,347 पुरुष, 351 महिलाएं, 89 साधु और 14 साध्वियां शामिल थीं, जो कुल 74 वाहनों के काफिले में यात्रा कर रहे थे। इस साल 3 जुलाई को यात्रा की शुरुआत से लेकर अब तक 4.71 लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन कर चुके हैं।

मौसम विभाग ने जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की सबसे ज्यादा संभावना जताई है, उनमें मुख्य रूप से दक्षिण कश्मीर, पीर पंजाल क्षेत्र और जम्मू संभाग के कई इलाके शामिल हैं। विशेष तौर पर कठुआ, रामबन, पीर पंजाल क्षेत्र, तथा दक्षिण कश्मीर के शोपियां, अनंतनाग और पुलवामा जिलों में कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान निचले इलाकों में अचानक जलस्तर बढ़ सकता है और फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

इस संभावित भारी बारिश का सीधा असर सड़क और यातायात व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। राष्ट्रीय राजमार्गों और विशेषकर पहाड़ी तथा पीर पंजाल क्षेत्रों में भूस्खलन होने, पर्वतों से पत्थर गिरने और सड़कों पर मलबा आने की प्रबल आशंका बनी हुई है। इससे यातायात व्यवस्था कुछ समय के लिए बाधित हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों और स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों तथा आम नागरिकों को सख्त सलाह दी है कि वे 10 से 12 अगस्त के बीच पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने से पहले ट्रैफिक विभाग से सड़क की स्थिति की सटीक जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। बिना पुख्ता जानकारी के संवेदनशील और जोखिम भरे रास्तों पर यात्रा करने से बचने की हिदायत दी गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पूरे जम्मू-कश्मीर में अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान नहीं है, लेकिन कुछ संवेदनशील स्थानों पर स्थानीय स्तर पर होने वाली मूसलाधार बारिश अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं को न्योता दे सकती है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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