पिता की मौत, मां की मजदूरी और पेट्रोल पंप की रोशनी में पढ़ता एलेक्स मुंडा— आदिवासी बच्चे लगन देख प्रशासन ने बढ़ाया मदद का हाथ
रांची के आदिवासी बच्चे एलेक्स मुंडा की पेट्रोल पंप की रोशनी में पढ़ाई करने की कहानी ने प्रशासन को झकझोर दिया। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की पहल पर एलेक्स को मासिक सहायता, मुफ्त शिक्षा और मां को आवास मिला। यह संवेदनशीलता और उम्मीद की मिसाल है।

रांची के एक पेट्रोल पंप की रोशनी में हर रात किताबों में झुका एक मासूम चेहरा, आज पूरे समाज के लिए उम्मीद और संवेदनशीलता की मिसाल बन गया है। यह कहानी है रांची के एक छोटे-से आदिवासी बच्चे एलेक्स मुंडा की, जो विपरीत हालातों के बावजूद शिक्षा का सपना थामे हुए था और उसकी मां नूतन टोप्पो की, जिनकी मेहनत और संघर्ष ने बेटे के भविष्य की नींव रखी।
एलेक्स की मां नूतन टोप्पो दिनभर पेट्रोल पंप पर मजदूरी करती हैं। पति के निधन के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर आ गई थी। आर्थिक तंगी इतनी थी कि घर में पढ़ने के लिए न बिजली थी, न साधन। लेकिन मां-बेटे ने हार नहीं मानी। रात के अंधेरे में पेट्रोल पंप की रोशनी ही एलेक्स की पढ़ाई का सहारा बन गई, जहां नूतन टोप्पो खुद बेटे को बैठकर पढ़ाती थीं। उनका एक ही सपना था—एलेक्स पढ़-लिखकर बेहतर जीवन जिए।
कुछ समय पहले एलेक्स की पढ़ाई करते हुए तस्वीर और उसकी संघर्षपूर्ण कहानी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंची। इस तस्वीर ने समाज के कई दिलों को छू लिया। संवेदनशीलता की यह आवाज आखिरकार रांची के उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री तक पहुंची। उन्होंने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए मां-बेटे को अपने कार्यालय में बुलाया और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
प्रशासन की पहल के बाद एलेक्स के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उसकी पढ़ाई के लिए हर महीने चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। जिस स्कूल में वह वर्तमान में पढ़ रहा है, वहां उसकी पूरी फीस माफ कर दी गई है। इसके साथ ही नूतन टोप्पो को आवास की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, जिससे परिवार को सुरक्षित छत मिल सके। अधिकारियों के अनुसार, एक वर्ष बाद एलेक्स को आवासीय विद्यालय में निःशुल्क शिक्षा दी जाएगी, ताकि उसे बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
यह घटना केवल एक बच्चे की मदद भर नहीं है, बल्कि यह उस संवेदनशील तंत्र का उदाहरण है, जहां समाज की जागरूकता और प्रशासन की तत्परता मिलकर किसी के भविष्य को नई दिशा दे सकती है। रांची की यह कहानी बताती है कि जब मां की मेहनत, लोगों की आवाज और प्रशासन की जिम्मेदारी एक साथ आती है, तो अंधेरे में भी उम्मीद की रोशनी दूर तक चमकती है।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
