फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI 2379) में चार अगस्त को हुई एक गंभीर घटना को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। इस बीच, एविएशन सेक्टर की सुरक्षा के लिए काम करने वाले एक्सपर्ट कैप्टन अमित सिंह का दावा है कि विमान किसी टर्बुलेंस का शिकार नहीं हुआ था, बल्कि यह मामला फॉल्स हाइड्रोलिक फेलियर वार्निंग और पायलट की जल्दबाजी से जुड़ा हो सकता है। इस घटना में चार एयर होस्टेस समेत कुल 17 यात्री घायल हो गए थे, जिसके बाद से लगातार इस पूरे मामले की गहन तकनीकी और आधिकारिक जांच की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन के संस्थापक कैप्टन अमित सिंह का मानना है कि यह बेहद दुर्लभ होता है कि किसी भी विमान के एक साथ सभी सिस्टम पूरी तरह फेल हो जाएं, क्योंकि ऐसी स्थिति में प्लेन को संभालना लगभग असंभव हो जाता है। इस मामले में यह आशंका जताई जा रही है कि प्लेन के कॉकपिट सिस्टम के सेंसर ने पायलटों को जो मल्टीपल हाइड्रोलिक फेल्योर के संकेत दिए थे, वे झूठे या तकनीकी त्रुटि के कारण हो सकते हैं। इन संकेतों से घबराकर पायलटों ने संभवतः जल्दबाजी दिखाई और प्लेन की नोज को अचानक नीचे की तरफ कर दिया। इस अचानक आए बदलाव के कारण विमान पहले लगभग 300 फीट तक नीचे गया और फिर स्थिति को संभालने के लिए उसे एकदम से ऊपर खींचा गया, जिसके झटके से यात्रियों और क्रू सदस्यों को गंभीर चोटें आईं।

मामले की जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उस दिन न तो इस फ्लाइट के आगे और न ही इसके पीछे चल रही किसी अन्य उड़ान को टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था। ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर इसी विशिष्ट फ्लाइट के साथ यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के साथ-साथ फ्रांस की प्रमुख एविएशन रेगुलेटर 'फ्रेंच सिविल एविएशन अथॉरिटी' को भी जांच में शामिल किया गया है, क्योंकि इस मामले में शामिल विमान एयरबस कंपनी का है। इसके अलावा, इस पूरी घटना की औपचारिक जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) द्वारा की जा रही है, जिसने इसे 'सीरियस इंसिडेंट' की श्रेणी में रखा है।

जांच का दायरा केवल तकनीकी पहलुओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सीनियर पायलट के नशे में होने की संभावना की भी पड़ताल की जा रही है क्योंकि वह शुरुआती डोप टेस्ट में फेल हो गए थे। अंतिम और पुख्ता रिपोर्ट के लिए उनके और नमूने लेकर लैब में भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट इसी सप्ताह आने की उम्मीद है।

फिलहाल, इस बात की पुष्टि केवल AAIB की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी कि क्या विमान में वास्तव में हाइड्रोलिक फेलियर हुआ था, जिसमें पायलटों ने सूझबूझ दिखाते हुए 145 यात्रियों की जान बचाई, या फिर यह घटना पायलटों की किसी जल्दबाजी या त्रुटि का परिणाम थी। जब तक आधिकारिक और अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। इस घटना ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा, कॉकपिट वार्निंग सिस्टम की सटीकता और क्रू प्रोटोकॉल के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर देश और दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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