कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख ने प्रदर्शन के समापन के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनके परिवार को सुरक्षा धमकियों का सामना करना पड़ा।

abhijeet dipke cjp : राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली का ऐतिहासिक राजनीतिक केंद्र जंतर-मंतर शनिवार को एक बार फिर भारी राजनीतिक गहमा-गहमी और तीखे विरोध प्रदर्शनों का गवाह बना। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित हुआ यह बड़ा शक्ति प्रदर्शन शनिवार शाम को समाप्त हो गया, लेकिन इसके खत्म होते ही शुरू हुआ बयानों का दौर अब और अधिक गरमा गया है। प्रदर्शन के ठीक बाद पार्टी के संस्थापक और मुख्य रणनीतिकार अभिजीत दीपके का पहला और बेहद भावुक करने वाला बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे राजनीतिक आंदोलन के पीछे चल रहे पारिवारिक संकट और सुरक्षा से जुड़े गंभीर पहलुओं को उजागर कर दिया है। दीपके के इस खुलासे ने न केवल समर्थकों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि राजधानी के सियासी गलियारों में भी नई चर्चा छेड़ दी है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शनिवार दोपहर को हुई जब जंतर-मंतर की सड़कों पर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने शुरू हुए। यह आंदोलन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित किया गया था। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद जनसैलाब का माहौल बेहद आक्रामक और प्रतीकात्मक था, जहां प्रदर्शनकारी अपने हाथों में राष्ट्रध्वज तिरंगा और भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें लेकर सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। इस भीड़ और समर्थन का एक वीडियो खुद अभिजीत दीपके ने दोपहर करीब चार बजे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर जारी किया, जिसमें उन्होंने सत्ता पक्ष पर सीधा तंज कसते हुए लिखा कि वे कहते हैं कि कॉकरोच कभी भी जमीन पर नहीं आते हैं, लेकिन आज की तस्वीर हकीकत बयां कर रही है।

जैसे ही शाम को आधिकारिक रूप से प्रदर्शन के समापन की घोषणा हुई, अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बेहद संवेदनशील पोस्ट साझा की। उन्होंने खुलासा किया कि राजनीतिक आंदोलन के इस सफर के दौरान उनके परिवार को भारी प्रताड़ना और सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ा है। दीपके ने बताया कि पिछले पंद्रह दिनों से उनके माता-पिता को लगातार गंभीर धमकियां मिल रही थीं, जिसके कारण मजबूरन उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा था। दीपके ने अत्यंत भावुक लहजे में लिखा कि वे एक साल से भी अधिक समय के बाद अपने माता-पिता से मिलने जा रहे हैं और अब वे उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ वापस उनके मूल घर लेकर लौटेंगे।

अगर इस पूरे आंदोलन के कानूनी और नीतिगत पहलुओं को देखें, तो देश की राजधानी के बेहद संवेदनशील इलाके में इस तरह के बड़े प्रदर्शनों के लिए दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक तंत्र से विशेष दिशा-निर्देशों के तहत अनुमति लेनी होती है। दीपके के बयान ने अब देश में राजनीतिक विरोध दर्ज कराने वाले कार्यकर्ताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा और उनके परिवारों को मिलने वाली धमकियों से जुड़े कानूनी अधिकारों पर एक नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि, इस पारिवारिक संकट के बावजूद दीपके के इरादे बेहद मजबूत दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में सरकार और विरोधियों को चेतावनी देते हुए अपनी पोस्ट में लिखा कि जंतर-मंतर पर आज जो कुछ भी देखा गया, वह तो सिर्फ एक ट्रेलर था और असली राजनीतिक फिल्म अभी बाकी है। इस आंदोलन की समाप्ति और दीपके के इन बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और उग्र रूप धारण कर सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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