मंत्री Girish Mahajan के भाषण पर भड़कीं महिला वनरक्षक; Atrocity Act के तहत मामला किया दर्ज
नासिक में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मंत्री गिरीश महाजन द्वारा डॉ. अंबेडकर का नाम न लेने पर वनरक्षक माधवी जाधव ने सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोल दिया। माधवी ने मंत्री के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल आ गया है। जानें इस विवाद की पूरी रिपोर्ट और कैसे एक महिला कर्मचारी के साहस ने सत्ता को कटघरे में खड़ा किया।

Nashik Controversy : गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर जहां पूरा देश संविधान के गौरव का उत्सव मना रहा था, वहीं महाराष्ट्र के नासिक में एक ऐसी घटना घटी जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। नासिक के पुलिस परेड ग्राउंड पर आयोजित मुख्य समारोह के दौरान महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन को एक महिला वनरक्षक के तीखे तेवरों और संवैधानिक अधिकारों की हुंकार का सामना करना पड़ा।
विवाद की जड़: भाषण में संविधान निर्माता का नाम गायब
26 जनवरी 2026 को ध्वजारोहण के पश्चात मंत्री गिरीश महाजन उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के योगदान का उल्लेख किया, लेकिन भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. बी.आर. अंबेडकर का नाम उनके संबोधन से छूट गया। गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर, जो सीधे तौर पर संविधान और उसके निर्माता से जुड़ा है, यह चूक वहां उपस्थित कई लोगों को खल गई।
माधवी जाधव का साहस: "निलंबन मंजूर, पर अपमान नहीं"
मंत्री के संबोधन के बीच ही ड्यूटी पर तैनात वनरक्षक माधवी जाधव ने सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने सीधे मंत्री को टोकते हुए डॉ. अंबेडकर का नाम न लेने पर सवाल खड़ा किया। घटनाक्रम तब और गंभीर हो गया जब माधवी ने स्पष्ट रूप से कहा:
"अगर इस सच्चाई को बोलने के लिए मुझे निलंबित भी किया जाता है, तो मुझे मंजूर है, लेकिन मैं माफी नहीं मांगूंगी।"
इस साहसी कदम के बाद, माधवी जाधव ने सीधे पुलिस का रुख किया और मंत्री गिरीश महाजन के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Atrocities Act) के तहत औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
मंत्री की सफाई और जन-प्रतिक्रिया :
मामले के तूल पकड़ते ही मंत्री गिरीश महाजन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने इसे "अनजाने में हुई चूक" (Unintentional slip) करार दिया। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था और यदि उनके शब्दों या चूक से किसी को दुख पहुँचा है, तो वह क्षमाप्रार्थी हैं।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। जहां एक ओर बड़ी संख्या में लोग माधवी जाधव के साहस और अपने आदर्शों के प्रति उनकी दृढ़ता की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अनुशासन का हवाला देते हुए उनके निलंबन की मांग भी उठ रही है।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव :
यह घटना केवल एक भाषण की चूक तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसने प्रोटोकॉल, अभिव्यक्ति की आजादी और संवैधानिक प्रतीकों के सम्मान पर एक नई बहस छेड़ दी है। नासिक पुलिस अब मामले की कानूनी पहलुओं से जांच कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन एक लोक सेवक के इस 'विद्रोह' और एक कैबिनेट मंत्री के खिलाफ हुई शिकायत पर क्या रुख अपनाता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
