Oracle Layoffs 2026 : वैश्विक IT सेक्टर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने भारतीय तकनीकी जगत की नींव हिला दी है। दिग्गज अमेरिकी आईटी कंपनी ऑरेकल (Oracle) ने एक बड़े सांगठनिक बदलाव का हवाला देते हुए दुनिया भर में अपने लगभग 30,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस छंटनी की सबसे कड़वी सच्चाई यह है कि प्रभावित होने वाले कर्मचारियों में 40 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं। भारत में मौजूद ऑरेकल के वर्कफोर्स के लिए यह किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है, जहां लगभग 12,000 पेशेवरों की आजीविका पर एक ही रात में संकट के बादल छा गए।

छंटनी का यह सिलसिला बेहद चौंकाने वाला रहा। कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों को भेजे गए आधिकारिक ईमेल में स्पष्ट किया कि वे अपने ऑपरेशन्स को सरल (Streamline) बनाने के लिए संगठन में बदलाव कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत कई पदों को समाप्त किया जा रहा है। डराने वाली बात यह है कि सूत्रों के अनुसार, यह केवल शुरुआत है; आने वाले एक महीने के भीतर छंटनी का एक और बड़ा दौर आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस पूरे संवेदनशील मामले पर ऑरेकल ने अब तक आधिकारिक तौर पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

भारतीय कर्मचारियों पर इस फैसले की मार सबसे अधिक पड़ी है। पूर्व कर्मचारियों का दावा है कि अमेरिका में कड़े श्रम कानूनों की तुलना में भारत में छंटनी करना कंपनी के लिए अधिक सरल रहा। भारत में ऑरेकल के कुल कर्मचारियों की संख्या लगभग 30,000 बताई जाती है, जिसका सीधा अर्थ यह है कि यहाँ का हर तीसरा कर्मचारी इस छंटनी की जद में आ गया है। कंपनी के पूर्व कर्मचारी मेरुगु श्रीधर ने इस दर्द को साझा करते हुए बताया कि उन्हें और उनके कई साथियों को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक निकाल दिया गया, जो आईटी सेक्टर में बढ़ते असुरक्षा के माहौल को दर्शाता है।

बाहर किए गए कर्मचारियों के लिए कंपनी ने एक 'सेवरेंस पैकेज' की घोषणा की है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • मूल मुआवजा : एक साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को 15 दिन की अतिरिक्त सैलरी।
  • बकाया भुगतान : टर्मिनेशन डेट तक का वेतन, लीव इनकैशमेंट और पात्रता के अनुसार ग्रेच्युटी।
  • नोटिस पीरियड : एक महीने के नोटिस पीरियड की सैलरी का भुगतान।
  • विशेष प्रोत्साहन : आपसी सहमति से इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त दो महीने का वेतन देने का प्रस्ताव।

ऑरेकल का यह कदम केवल एक कंपनी का आंतरिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आईटी बाजार में आने वाली संभावित मंदी और एआई (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच मानव संसाधन की घटती मांग का एक गंभीर संकेत है। हजारों भारतीय इंजीनियरों का भविष्य अब अनिश्चितता के भंवर में है, और यह घटनाक्रम भारतीय आईटी हब बेंगलुरू से लेकर हैदराबाद तक एक नई बहस को जन्म दे रहा है कि आखिर कब तक डिजिटल क्रांति की कीमत इंसानी नौकरियों से चुकाई जाएगी।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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