8वें वेतन आयोग का मेगा धमाका; सालाना इंक्रीमेंट के साथ NC-JCM ने सौंपा ऐतिहासिक मेमोरेंडम
8th Pay Commission का मास्टर प्लान: ₹69,000 न्यूनतम सैलरी, 6% सालाना इंक्रीमेंट और 67% पेंशन का प्रस्ताव। जानें NC-JCM के नए मेमोरेंडम में कर्मचारियों के लिए क्या है खास।

8वें वेतन आयोग के तहत वेतन वृद्धि और आर्थिक प्रगति को दर्शाता एक ग्राफिकल चार्ट

8th Pay Commission NC-JCM memorandum 2026 : भारत के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों के लिए एक ऐसा अध्याय शुरू होने जा रहा है, जो उनके भविष्य की आर्थिक तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है। नेशनल काउंसिल (JCM) की स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को अपना आधिकारिक साझा ज्ञापन (Common Memorandum) सौंप दिया है, जिसमें वेतन वृद्धि और सुविधाओं को लेकर अब तक की सबसे क्रांतिकारी मांगें रखी गई हैं। इस मेमोरेंडम की सबसे सनसनीखेज सिफारिश न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) को वर्तमान के ₹18,000 से सीधे 283 प्रतिशत बढ़ाकर ₹69,000 करने की है। यदि केंद्र सरकार इन प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगाती है, तो यह आजादी के बाद का सबसे बड़ा वेतन संशोधन साबित होगा, जो सरकारी सेवा के प्रति आकर्षण और कर्मचारियों के जीवन स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
कर्मचारी संगठनों के प्रमुख नेता शिव गोपाल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत इस दस्तावेज में केवल वेतन बढ़ाने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि पूरे 'पे-स्ट्रक्चर' को सरल और आधुनिक बनाने का खाका पेश किया गया है। वर्तमान में लागू 18 अलग-अलग 'पे लेवल' को घटाकर केवल 7 व्यापक पे-स्केल में विलय करने का प्रस्ताव है, ताकि करियर प्रमोशन में आने वाली बाधाओं को खत्म किया जा सके। इसके साथ ही, वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) की दर को वर्तमान के 3 प्रतिशत से दोगुना कर 6 प्रतिशत करने की मांग की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 3.83 के प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर के साथ ये बदलाव महंगाई के दौर में कर्मचारियों की क्रय शक्ति को वास्तविक मजबूती प्रदान करेंगे।
कॉमरेड्स,
— Shiva Gopal Mishra (@ShivaGopalMish1) April 14, 2026
आठवें वेतन आयोग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा हूं। नेशनल काउंसिल (JCM) के सेक्रेटरी के रूप में हमारी ओर से आठवें वेतन आयोग को तय समय सीमा से काफी पहले आज मेमोरेंडम भेज दिया गया है।
बढ़ती महंगाई और जीवन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कई अहम मांगें रखी…
सामाजिक सुरक्षा और पारिवारिक कल्याण के क्षेत्र में भी इस मेमोरेंडम ने एक नई मिसाल पेश की है। पहली बार 'फैमिली यूनिट' की परिभाषा को बदलते हुए इसमें माता-पिता को भी शामिल करने और यूनिट की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 करने का सुझाव दिया गया है। महिला कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लीव को 180 दिन से बढ़ाकर 240 दिन करने और 'पैरेंट केयर लीव' जैसे प्रावधानों को जोड़कर इसे एक कर्मचारी-हितैषी दस्तावेज बनाया गया है। पेंशनभोगियों के लिए भी प्रस्ताव में बड़ी राहत की बात कही गई है, जिसमें पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के साथ-साथ पेंशन की राशि को अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 67 प्रतिशत करने की पुरजोर वकालत की गई है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।


