8th Pay Commission Alert : जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में 8वें वेतन आयोग ने हाल ही में अपना काम शुरू कर दिया है। यह कदम टर्म ऑफ रेफरेंस (टीओआर) की औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद उठाया गया। आयोग की सिफारिशों का सीधा असर 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनधारकों पर पड़ेगा, जिससे उनके वेतन और पेंशन की संरचना में संभावित बदलाव हो सकते हैं।

सभी की निगाह अब “फिटमेंट फैक्टर” पर टिकी है, क्योंकि यह फैक्टर सीधे वेतन और पेंशन की गणना में उपयोग किया जाता है। आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय सरकार को सौंपनी है, जिसमें फिटमेंट फैक्टर से लेकर बेसिक पे संरचना तक के सुझाव शामिल होंगे। हालांकि, अंतिम निर्णय केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।

फिटमेंट फैक्टर तय करने में मुद्रास्फीति, जीवन-यापन की लागत और देश की वित्तीय स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। सातवें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था, और अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग में भी यह इसी के आसपास रह सकता है। जुलाई में आई एम्बिट कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.46 के बीच हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का बेसिक पे 18,000 रुपये है, तो 1.83 के फैक्टर पर उसकी सैलरी 39,940 रुपये और 2.46 फैक्टर पर 44,280 रुपये तक बढ़ सकती है।

गौरतलब है कि आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा इस साल की शुरुआत में हुई थी, लेकिन औपचारिक तौर पर यह ऐलान करीब दस महीने देरी से हुआ। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट को अगले साल से लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अधिक संभावना है कि नई सिफारिशें 2027 से लागू होंगी और कर्मचारियों को एरियर समेत अतिरिक्त वेतन या पेंशन के रूप में लाभ मिलेगा।

इस निर्णय का महत्व न केवल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से है, बल्कि यह देश की केंद्रीय वेतन नीति और वित्तीय प्रबंधन के दिशा-निर्देशों पर भी प्रभाव डालेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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