मुख्य आरोपी राजीव रंगीला की तलाश तेज, पूर्व डीजीएचएस के सरकारी गवाह बनने की संभावना से बढ़ी कई बड़े लोगों की मुश्किलें।

650 करोड़ रुपये के कथित दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने अपनी कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ा दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी राजीव अरोड़ा, जिसे राजीव रंगीला के नाम से जाना जाता है, की धर-पकड़ के लिए जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। एसीबी की टीमें दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में लगातार दबिश दे रही हैं। राजीव रंगीला के खिलाफ जांच में सहयोग न करने के कारण पहले ही गैर-जमानती वारंट और लुकआउट सर्कुलर जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों का मानना है कि अरोड़ा की गिरफ्तारी से खरीद प्रक्रिया, टेंडर सिस्टम और वेंडर नेटवर्क से जुड़े कई गहरे राज सामने आ सकते हैं।

मामले में नया मोड़ तब आया जब स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व महानिदेशक (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल के रुख में बदलाव देखने को मिला। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने जांच एजेंसियों के समक्ष साक्ष्य देने और सरकारी गवाह बनने की सहमति जताई है। उनके इस संभावित कदम से स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया है कि अगर डॉ. वत्सला अग्रवाल सरकारी गवाह बनती हैं, तो इस घोटाले में शामिल कई प्रभावशाली लोग और राजनेता जांच के दायरे में आ सकते हैं। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि इस प्रक्रिया में बाजार मूल्य से कहीं अधिक दरों पर खरीदारी की गई और फर्जी बिलों के माध्यम से कंपनियों को अवैध मुनाफा पहुंचाया गया।

जांच एजेंसियां फिलहाल आरोपी के विस्तृत कारोबारी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और दवा खरीद से संबंधित दस्तावेजों का गहन विश्लेषण कर रही हैं। एसीबी का मानना है कि यह घोटाला एक सोची-समझी साजिश के तहत संचालित किया गया था, जिसमें बिचौलियों की बड़ी भूमिका रही है। फिलहाल, जांच का मुख्य केंद्र उन कंपनियों और अधिकारियों की भूमिका तय करना है, जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद बढ़ रही है। आरोपी राजीव रंगीला की निरंतर अनुपस्थिति और उसके विदेश भागने की सूचनाओं के बीच एजेंसियों की प्राथमिकता उसकी गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करना है। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता का है, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण बनकर उभरा है, जिसके कानूनी परिणाम भविष्य में कई बड़े चेहरों को प्रभावित कर सकते हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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