103 साल की उम्र में मिला इंसाफ: 35 साल की कानूनी लड़ाई जीतकर हबीबन खातून ने वापस पाई अपनी जमीन|
35 वर्षों के संघर्ष के बाद मोतिहारी में बुजुर्ग हबीबन खातून को मिला जमीन का हक। पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में पूरी हुई दखल-दहानी की कार्रवाई।

पूर्वी चंपारण के मंगलापुर गांव में प्रशासन और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हबीबन खातून को जमीन का कब्जा सौंपा गया।
न्याय मिलने की कोई उम्र नहीं होती, यह बात पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड के मंगलापुर गांव की 103 वर्षीय हबीबन खातून ने सच कर दिखाई है। करीब 35 वर्षों तक कानूनी दांव-पेच और अदालतों के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार उन्हें अपनी जमीन पर कानूनी हक मिल गया है। इस लंबी कानूनी लड़ाई का अंत बुधवार को तब हुआ, जब प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए उन्हें विधिवत दखल-दहानी कराई।
विवाद का इतिहास वर्ष 1994 से जुड़ा है, जब 1 कट्ठा 4 धुर जमीन को लेकर हबीबन खातून और अन्य पक्षों के बीच कानूनी खींचतान शुरू हुई थी। दशकों तक चली इस लंबी सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के बाद, अदालत ने अंततः हबीबन खातून के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। न्यायालय के इस निर्देश को क्रियान्वित करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए लगभग 300 पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी।
प्रशासनिक टीम ने मंगलापुर गांव पहुंचकर पूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। न्यायालय के आदेश की सार्वजनिक घोषणा करने के लिए गांव में पारंपरिक तरीके से डुगडुगी बजवाई गई, ताकि सभी को कानूनी कार्रवाई की जानकारी हो सके। थाना प्रभारी विनीत कुमार ने बताया कि अदालती आदेश का पालन कराना पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता थी, जिसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्ण पूरा कर लिया गया है। भूमि का कब्जा मिलने के बाद हबीबन खातून और उनके परिजनों ने अदालत और प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया। परिजनों का कहना है कि यह निर्णय न केवल उनके धैर्य की जीत है, बल्कि न्यायिक प्रणाली पर उनके अटूट विश्वास का परिणाम भी है। 35 वर्षों के संघर्ष के बाद जमीन का हक मिलना उस वृद्ध महिला के लिए एक बड़ी राहत है, जिसने अपनी पूरी उम्र इसी उम्मीद में बिता दी थी कि एक दिन न्याय अवश्य मिलेगा। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि कानून की प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन अंत में सत्य की विजय होती है।

Lalita Rajput
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