राजकीय चिकित्सालय दूनी की घोर प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता के चलते एक 36 वर्षीय युवक को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। अस्पताल में समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण दम तोड़ने वाले युवक की मौत के बाद गुरुवार को पूरे क्षेत्र का आक्रोश फूट पड़ा। घटना से गुस्साए परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने दूनी कस्बे के मुख्य बाजार को पूर्ण रूप से बंद करवा दिया और दूनी-सरोली मार्ग पर टायर जलाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी व उग्र प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की शह पर कार्यरत तीनों चिकित्सकों को एक साथ छुट्टी दे दी गई, जिससे आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पूरी तरह भगवान भरोसे रहा।

घटनाक्रम के अनुसार, दूनी निवासी और ई-मित्र की दुकान चलाने वाले 36 वर्षीय युवक अनुराग पारीक पुत्र स्वर्गीय कैलाश पारीक की बुधवार रात अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। परिजन उसे तुरंत राजकीय चिकित्सालय दूनी लेकर पहुंचे, लेकिन वहां की स्थिति देखकर उनके होश उड़ गए। अस्पताल में तैनात तीनों डॉक्टर नदारद थे। यहां तक कि नगरफोर्ट से प्रतिनियुक्ति पर तैनात किए गए डॉक्टर भी मौके पर मौजूद नहीं मिले। अस्पताल में तड़पते मरीज को कोई प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं हुआ। लाचार परिजन आनन-फानन में अनुराग को गंभीर हालत में टोंक ले जाने के लिए रवाना हुए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; समय पर इलाज न मिलने के कारण अनुराग ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक अपने पीछे एक 8 साल का मासूम बच्चा छोड़ गया है, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

मामले की गंभीरता और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए देवली एसडीओ रुबी अंसार, सीएमएचओ डॉ. शैलेन्द्र चौधरी, बीसीएमओ डॉ. मनीष यादव, पुलिस उपाधीक्षक हेमराज चौधरी, तहसीलदार विनोद शर्मा और दूनी थानाधिकारी रतनसिंह तंवर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर करीब 5 घंटे तक गतिरोध और तीखा विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। स्थिति इस कदर तनावपूर्ण थी कि सीएमएचओ डॉ. शैलेंद्र चौधरी ने हाथ जोड़कर आक्रोशित ग्रामीणों को समझाने का पुरजोर प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े रहे।

आखिरकार, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच वार्ता के बाद एक दिन के अल्टीमेटम पर सहमति बनी। सीएमएचओ ने लापरवाही के आरोपी चिकित्सालय प्रभारी डॉ. सतीश जोरहवाल, डॉ. जितेश शिवनानी और नगरफोर्ट से प्रतिनियुक्ति पर तैनात सचिन के विरुद्ध उच्च स्तरीय जांच कराकर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके साथ ही प्रशासन ने दूनी अस्पताल की चरमराई चिकित्सा व्यवस्था को जल्द से जल्द पूरी तरह सुधारने का भरोसा दिलाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त किया। यह दर्दनाक घटना सरकारी दावों की पोल खोलती है और सबक देती है कि स्वास्थ्य सेवाओं में इस तरह की जानलेवा लापरवाही किसी हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र का जख्म दे सकती है।

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