जोहो कॉर्पोरेशन ने इंटेल के सहयोग से पूरी तरह स्वदेशी सर्वर ‘नाथू ला’ पेश किया है, जो बिजली की खपत और परिचालन लागत को कम करने में सक्षम है।

भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए ज़ोहो कॉर्पोरेशन ने अपने स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए सर्वर ‘नाथू ला’ को लॉन्च कर दिया है। हार्डवेयर से लेकर सॉफ्टवेयर तक पूरी तकनीकी श्रृंखला को स्वयं विकसित करने की कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति के तहत पेश किया गया यह सर्वर न केवल प्रदर्शन क्षमता को मजबूत करता है, बल्कि परिचालन लागत और ऊर्जा खपत में भी उल्लेखनीय कमी लाने का दावा करता है।

मैनेजइंजन और ज़ोहो जैसे वैश्विक स्तर पर चर्चित ब्रांड्स की मूल कंपनी ज़ोहो कॉर्पोरेशन के अनुसार, इंटेल ज़ियॉन 6 प्रोसेसर से लैस ‘नाथू ला’ सर्वर को इंटेल के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह सर्वर समान प्रदर्शन के साथ 12 से 18 प्रतिशत तक कम बिजली की खपत करता है तथा कुल स्वामित्व लागत (टीसीओ) में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी लाने में सक्षम है। इस परियोजना का अनुसंधान एवं विकास कार्य नागपुर में प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं की टीम द्वारा किया गया, जिसे कंपनी ने विशेष रूप से तैयार किया था।

भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन सर्वर तकनीक के क्षेत्र में लंबे समय से विदेशी निर्भरता बनी हुई थी। ऐसे परिदृश्य में ज़ोहो उन चुनिंदा भारतीय तकनीकी कंपनियों में शामिल हो गई है, जिसने पूरी तरह स्वदेशी सर्वर प्लेटफॉर्म विकसित किया है और जिसकी बौद्धिक संपदा का स्वामित्व भारत के पास है। इससे विदेशी रॉयल्टी और लाइसेंस शुल्क पर निर्भरता कम होने की संभावना भी बढ़ी है।

ज़ोहो कॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेश डेवी ने कहा कि ‘नाथू ला’ का विकास भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, यह उपलब्धि साबित करती है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी अत्याधुनिक और जटिल तकनीकों का सफलतापूर्वक विकास कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी अनुसंधान, विकास और कौशल निर्माण में निरंतर निवेश के माध्यम से तकनीक के साथ-साथ उसे विकसित करने वाली प्रतिभाओं को भी तैयार कर रही है।

‘नाथू ला’ सर्वर की विकास यात्रा वर्ष 2020 में नागपुर में गठित एक छोटी रिसर्च टीम से शुरू हुई थी। बाद में वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा सर्वर सहित कई कंप्यूटिंग डिवाइसेस के आयात पर प्रतिबंधों की घोषणा के बाद इस क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक विकसित करने की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई। पांच वर्षों से अधिक समय तक चले अनुसंधान एवं विकास के परिणामस्वरूप तैयार किए गए इस सर्वर का मदरबोर्ड, चेसिस प्लेटफॉर्म, फर्मवेयर और सिस्टम मैनेजमेंट पूरी तरह स्वदेशी प्रयासों का परिणाम हैं।

वर्चुअलाइजेशन, हाई परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग, एआई इन्फरेंस और स्टोरेज एप्लिकेशंस जैसे विविध उपयोगों के लिए विकसित यह सर्वर कस्टमाइज्ड पावर डिलीवरी सिस्टम, ज़ोहो द्वारा निर्मित डीसी-एससीएम (डेटा सेंटर सिक्योर कंट्रोल मॉड्यूल) तथा मॉड्यूलर चेसिस विकल्पों से लैस है। डीसी-एससीएम और नेटवर्क इंटरफेस कार्ड सहित प्रमुख मॉड्यूलर कंपोनेंट्स को कंपनी की हार्डवेयर इंजीनियरिंग टीम ने डिज़ाइन किया है और भारतीय ईएमएस साझेदारों के सहयोग से निर्मित किया गया है। इसके अतिरिक्त उन्नत थर्मल मैनेजमेंट और कम लागत वाली सर्वर आर्किटेक्चर से संबंधित पांच से अधिक पेटेंट भी दाखिल किए जा चुके हैं।

ज़ोहो ने स्पष्ट किया है कि वह आने वाले समय में अपने कई एप्लिकेशंस को ‘नाथू ला’ प्लेटफॉर्म पर संचालित करने की योजना बना रही है। इससे कंपनी को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बेहतर एकीकरण का लाभ मिलेगा। कंपनी के अनुसार, इससे प्रदर्शन में सुधार, लागत में कमी, डेटा सुरक्षा को मजबूती और एआई आधारित कार्यों के संचालन में अधिक दक्षता प्राप्त होगी।

इसी क्रम में कंपनी नागपुर में ‘सेतु’ (स्टूडेंट्स एंगेजमेंट फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव अपस्किलिंग) नामक कौशल विकास कार्यक्रम भी संचालित कर रही है। यह पहल टियर-2 शहरों के युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाती है और अब तक 300 से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल चुका है। इनमें से कई युवाओं ने ‘नाथू ला’ सहित विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में योगदान दिया है और उन्हें कंपनी में रोजगार के अवसर भी प्राप्त हुए हैं।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी ‘नाथू ला’ को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी पूरी बौद्धिक संपदा भारत में विकसित की गई है, जिससे सुरक्षा ऑडिट, फर्मवेयर अपडेट और लाइसेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता कम होगी। यह समाधान ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर नीति और स्थानीय सामग्री से जुड़े उच्च मानकों के अनुरूप है तथा ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ और ‘राष्ट्रीय सुपरकम्प्यूटिंग मिशन’ जैसी राष्ट्रीय पहलों को भी मजबूती प्रदान करता है।

भारत में विकसित यह सर्वर केवल एक तकनीकी उत्पाद नहीं, बल्कि देश की डिजिटल संप्रभुता, स्वदेशी नवाचार और स्थानीय प्रतिभाओं की क्षमता का प्रतीक बनकर उभरा है। ‘नाथू ला’ की लॉन्चिंग तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है, जो भविष्य में देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे और हाई-परफॉर्मेंस कम्प्यूटिंग क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान कर सकती है।

Pratahkal Bureau

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