दुनिया भर के अंतरिक्ष प्रेमियों के बीच इस हफ्ते एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। आगामी 27 और 28 अगस्त की दरम्यानी रात को लगने वाले आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का एक बहुत बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में छुप जाएगा। खगोल विज्ञान के जानकारों के अनुसार, इस खगोलीय घटना के दौरान चांद की चौड़ाई का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की अंदरूनी और गहरी छाया के दायरे में आ जाएगा। इस अनोखे नजारे के तहत चंद्रमा का केवल एक छोटा सा किनारा ही बाहर बचा रहेगा, जो आम दिनों की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक चमकदार और कटा हुआ दिखाई देगा।

यह अद्भुत आंशिक चंद्र ग्रहण तब घटित होता है, जब महीने की पूर्णिमा तिथि के दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के ठीक बीच से गुजरती है। इस प्रक्रिया के दौरान पृथ्वी की घुमावदार और गहरी अंदरूनी छाया चंद्रमा की सतह पर धीरे-धीरे आगे बढ़ती हुई नजर आती है। ग्रहण के अपने चरम और सबसे ज्यादा असर वाले समय के दौरान चंद्रमा की एक बेहद पतली अर्धचंद्राकार पट्टी पर सीधी धूप पड़ती रहती है, जिससे आसमान में एक मनमोहक और रहस्यमयी दृश्य बनता है। वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम जनमानस के लिए भी यह नजारा काफी रोमांचक होने वाला है।

यह दुर्लभ चंद्र ग्रहण दुनिया के एक बहुत बड़े हिस्से में आसानी से देखा जा सकेगा। उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले करीब 3.3 अरब लोग इस खगोलीय घटना के साक्षी बन सकेंगे। पृथ्वी पर मौजूद सभी दर्शकों के लिए ग्रहण के चरण एक ही समय पर घटित होंगे, हालांकि अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार इसका स्थानीय समय भिन्न हो सकता है। अमेरिका के वेस्ट कोस्ट पर स्थित लॉस एंजिल्स और पोर्टलैंड जैसे शहरों में यह नजारा सूरज ढलने के कुछ ही घंटों बाद दिखाई देगा, जबकि न्यूयॉर्क और जैक्सनविले जैसे ईस्ट कोस्ट के शहरों में यह आधी रात के आसपास अपने चरम पर होगा। वहीं यूके, यूरोप और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में यह घटना सूर्योदय से ठीक पहले सुबह के वक्त नजर आएगी।

हालांकि, भारत और एशिया के कई अन्य देशों के लोगों को इस दुर्लभ नजारे से निराशा हाथ लग सकती है। भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा, क्योंकि जिस वक्त यह घटना घटित होगी, उस दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में दिन का समय हो रहा होगा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान जैसे देशों में भी दिन होने के कारण लोग इसे नहीं देख सकेंगे। खगोल विज्ञान के जानकारों के अनुसार, सूर्य ग्रहण के विपरीत चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी भी तरह के विशेष सुरक्षा चश्मे या महंगे उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है। इसे आसानी से नंगी आंखों से देखा जा सकता है, हालांकि यदि कोई व्यक्ति दूरबीन या टेलीस्कोप का इस्तेमाल करता है, तो उसे यह अनुभव और भी ज्यादा साफ और बेहतरीन मिल सकता है।

चंद्र ग्रहण की पूरी प्रक्रिया विज्ञान के एक सरल नियम पर आधारित होती है, जिसमें जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य तीनों एक सीध में आ जाते हैं, तब चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है। इस दौरान चांद पूरी तरह से आसमान से गायब नहीं होता है, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर और मुड़कर आने वाली रोशनी के कारण इसका रंग गहरे लाल रंग में बदल जाता है। इसी अनूठी और खूबसूरत लालिमा के कारण इसे लोकप्रिय रूप से 'ब्लड मून' भी कहा जाता है। इस हफ्ते होने जा रही यह खगोलीय घटना विज्ञान प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आ रही है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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