क्या AI के कारण तकनीकी कर्मचारियों पर बढ़ेगा नौकरी का ३ % ज्यादा खतरा? जानें गैलप की स्टडी का खुलासा
गैलप की रिसर्च के अनुसार आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का कम उपयोग करने वाले टेक प्रोफेशनल्स की नौकरी जाने की संभावना नियमित यूज़र्स से तीन गुना बढ़ गई है।

कॉर्पोरेट कार्यालय में लैपटॉप पर काम करते तकनीकी कर्मचारी, जिनके करियर पर गैलप की नवीनतम शोध के अनुसार आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस कौशल की कमी के कारण छंटनी का खतरा बढ़ रहा है।
Gallup study tech worker layoffs AI skills : वैश्विक कॉर्पोरेट जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की धमक ने न केवल काम करने के तरीकों को बदल दिया है, बल्कि अब यह पेशेवर करियर की सुरक्षा के लिए सबसे निर्णायक पैमाना बनता जा रहा है। वैश्विक स्तर पर मशहूर रिसर्च एजेंसी गैलप (Gallup) द्वारा जारी एक हालिया और चौंकाने वाली स्टडी ने तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। इस शोध के सांख्यिकीय आंकड़े साफ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि बदलते दौर में जो टेक प्रोफेशनल्स खुद को नई तकनीक के अनुरूप ढालने में नाकाम साबित हो रहे हैं, उनके करियर पर छंटनी की तलवार सबसे तेजी से लटक रही है। अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, एआई तकनीकों का उपयोग न करने वाले या इससे दूरी बनाए रखने वाले तकनीकी कर्मचारियों के नौकरी गंवाने का जोखिम, नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने वाले साथियों की तुलना में तीन गुना से भी अधिक बढ़ गया है।
इस व्यापक और गहन शोध के मुख्य सांख्यिकीय पहलुओं को समझें तो गैलप ने फरवरी महीने के दौरान अमेरिका में 23,000 से भी अधिक कामकाजी कर्मचारियों के कार्यबल पर एक विस्तृत सर्वे आयोजित किया था। इस विशाल डेटाबेस के विश्लेषण के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि कुल प्रतिभागियों में से 620 कामकाजी लोग पहले ही अपनी नौकरियों से हाथ धो बैठे थे। जब इन छंटनीशुदा कर्मचारियों के कार्य करने के तौर-तरीकों का बारीकी से वर्गीकरण किया गया, तो बेहद हैरान करने वाले समीकरण सामने आए। आंकड़ों के मुताबिक, जो तकनीकी कर्मचारी महीने में एक बार से भी कम अवधि के लिए एआई टूल्स का उपयोग करते हैं, उनके लिए नौकरी से निकाले जाने की संभावना 18 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। इसके विपरीत, जो पेशेवर काम के दौरान महीने में कम से कम एक बार या उससे अधिक नियमित रूप से एआई को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाते हैं, उनके लिए यह खतरा केवल 6 प्रतिशत तक ही सीमित रहता है, जो सीधे तौर पर तीन गुने के भारी अंतर को प्रमाणित करता है।
वैश्विक आईटी और टेक सेक्टर के मौजूदा हालातों पर नजर डालें तो यह रिसर्च इस क्षेत्र में पहले से ही जारी मंदी और अनिश्चितता की एक और स्याह तस्वीर पेश करती है। सांख्यिकीय विश्लेषण के अनुसार, कुल कामकाजी आबादी में तकनीकी कर्मचारियों की वैश्विक हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत के करीब है, लेकिन इसके विपरीत पूरी दुनिया में नौकरी गंवाने वाले कुल कार्यबल में अकेले टेक प्रोफेशनल्स का हिस्सा 13 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है। यह असंतुलन दर्शाता है कि पूरी तकनीकी इंडस्ट्री इस वक्त बदलाव के एक बेहद संवेदनशील और नाजुक दौर से गुजर रही है। यही वजह है कि गैलप की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में टेक सेक्टर में कार्यरत लगभग 31 प्रतिशत कर्मचारियों के भीतर यह गहरा मनोवैज्ञानिक डर घर कर गया है कि भविष्य में उभरती हुई नई तकनीकों और एआई के लगातार बढ़ते वर्चस्व के चलते उनकी आजीविका किसी भी वक्त छिन सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के सबसे महत्वपूर्ण और छिपे हुए आधिकारिक पहलू को देखें तो कॉर्पोरेट जगत में कंपनियां सीधे तौर पर एआई को छंटनी का आधिकारिक कारण बताने से बच रही हैं। रिपोर्ट के विधिक और व्यावहारिक आंकड़ों के अनुसार, हालिया दौर में ले-ऑफ का शिकार हुए कुल कर्मचारियों में से केवल 1 प्रतिशत लोगों ने ही सीधे तौर पर स्वीकार किया कि उनकी नौकरी जाने की मुख्य वजह एआई का आना था। अधिकांश प्रभावित कर्मचारियों को कंपनियों द्वारा नौकरी से मुक्त करते समय संगठनात्मक पुनर्गठन, परिचालन लागत में कटौती और वैश्विक आर्थिक मंदी जैसे पारंपरिक और सामान्य विधिक कारणों का हवाला दिया गया। हालांकि, गैलप के वरिष्ठ शोधकर्ताओं और विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यह 1 प्रतिशत का सतही आंकड़ा एआई के वास्तविक और जमीनी प्रभाव को पूरी तरह से प्रदर्शित नहीं करता है। परोक्ष रूप से कॉर्पोरेट प्रबंधन छंटनी की सूचियां तैयार करते समय आंतरिक रूप से यह कड़ा पैमाना अपना रहा है कि कौन सा कर्मचारी नई एआई प्रणालियों के साथ सहजता से उत्पादकता बढ़ा रहा है और कौन पुरानी लीक पर चल रहा है।
इस वैश्विक अध्ययन के दूरगामी निष्कर्ष यह साफ कर देते हैं कि आने वाले समय में केवल पारंपरिक कोडिंग या तकनीकी ज्ञान रोजगार की सुरक्षा की गारंटी नहीं होगा। कार्यस्थल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने में दिखाई गई उदासीनता किसी भी पेशेवर को प्रतिस्पर्धा की दौड़ से पूरी तरह बाहर कर सकती है। वैश्विक बाजार और तकनीकी फर्मों में आ रहे इस बड़े ढांचागत बदलाव का सीधा संदेश यही है कि तकनीकी कार्यबल को अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने के लिए निरंतर अपस्किलिंग और एआई को गले लगाना ही होगा, अन्यथा छंटनी के इस बेतरतीब दौर में उनके करियर की सुरक्षा सुनिश्चित करना नामुमकिन हो जाएगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
