क्या AI बन रहा है बाजार के लिए खतरा? जानें क्या है SEBI का बड़ा ‘Cyber Suraksha’ प्लान
SEBI ने AI से बढ़ते साइबर खतरों के बीच ‘Cyber Suraksha AI’ टास्क फोर्स का गठन किया है। यह पहल वित्तीय बाजार में डेटा सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

मुंबई स्थित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का मुख्यालय
भारत के वित्तीय बाजारों की सुरक्षा को लेकर एक अहम और दूरगामी कदम उठाते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उत्पन्न हो रहे साइबर खतरों से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। तेजी से बदलती तकनीक और उसके साथ बढ़ते जोखिमों के बीच यह फैसला बाजार की स्थिरता और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंगलवार को जारी एक आधिकारिक परिपत्र में SEBI ने स्पष्ट किया कि एआई आधारित टूल्स, जो सिस्टम की कमजोरियों की पहचान करने में सक्षम हैं, अब दोधारी तलवार बनते जा रहे हैं। ‘Mythos’ जैसे उन्नत AI टूल्स जहां साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं, वहीं इनके दुरुपयोग से बड़े पैमाने पर सिस्टम के शोषण का खतरा भी बढ़ रहा है। इससे डेटा की गोपनीयता, एप्लिकेशन की अखंडता और आउटपुट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
SEBI ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारतीय प्रतिभूति बाजार एक अत्यंत परस्पर जुड़ा हुआ इकोसिस्टम है, जहां किसी एक प्रतिभागी की कमजोरी पूरे सिस्टम पर प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की साइबर चूक का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। इसी कारण नियामक ने एक समन्वित और निरंतर निगरानी वाले दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि संभावित खतरों को समय रहते पहचाना और नियंत्रित किया जा सके।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए गठित ‘Cyber Suraksha AI’ टास्क फोर्स में बाजार अवसंरचना संस्थानों, योग्य रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंट्स तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। यह समूह एआई आधारित मॉडलों से उत्पन्न साइबर जोखिमों का आकलन करेगा, प्रभावी निवारण रणनीतियां तैयार करेगा, खतरे से जुड़ी सूचनाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, और तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं की साइबर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा भी करेगा।
SEBI ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि बाजार की आपसी निर्भरता को देखते हुए नियमित रूप से कमजोरियों का आकलन, सूचनाओं का साझा करना और साइबर जोखिमों की निगरानी बेहद आवश्यक है, ताकि किसी भी संभावित खतरे के व्यापक प्रभाव को रोका जा सके। इसके साथ ही टास्क फोर्स को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वह साइबर घटनाओं और कमजोरियों की समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करे।
वित्तीय क्षेत्र में AI का उपयोग जहां धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम को मजबूत बना रहा है, वहीं यह नई प्रकार की चुनौतियां भी सामने ला रहा है। SEBI का यह कदम इस दिशा में एक सक्रिय नियामक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है, जो यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि तकनीकी प्रगति बाजार की सुरक्षा से आगे न निकल जाए।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
