देश में बढ़ते साइबर अपराधों, फर्जी कॉलों और डिजिटल ठगी के बीच दूरसंचार विभाग द्वारा विकसित ‘संचार साथी’ अब नागरिकों की सुरक्षा का सबसे विश्वसनीय डिजिटल कवच बनकर उभर रहा है। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के रूप में उपलब्ध यह पहल न केवल मोबाइल सब्सक्राइबर्स को सशक्त बनाती है, बल्कि उन्हें संभावित खतरों से सावधान रहने के लिए लगातार जागरूक भी करती है।

शुरुआत से ही संचार साथी का उद्देश्य सरल किन्तु महत्वपूर्ण रहा है — मोबाइल उपभोक्ताओं की सुरक्षा को बढ़ाना, अवैध संचार पर नियंत्रण करना और सरकारी नागरिक-केंद्रित पहलों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना। यही वजह है कि यह प्लेटफ़ॉर्म कई महत्वपूर्ण सेवाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध कराता है, जिन्हें आम नागरिक आसानी से उपयोग कर रहे हैं।

कहानी का मुख्य हिस्सा ‘चक्षु’ सुविधा के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसे विशेष रूप से उन संदिग्ध संचारों की रिपोर्टिंग के लिए बनाया गया है, जिनका उद्देश्य लोगों को धोखा देना या ठगी का प्रयास करना होता है। चाहे असली बैंक के नाम पर भेजा गया फर्जी KYC मैसेज हो, WhatsApp पर निवेश का लालच हो, बिजली बिल भुगतान का डर दिखाने वाला SMS हो या खुद को सरकारी अधिकारी बताकर की जाने वाली कॉल—‘चक्षु’ ऐसी हर गतिविधि पर पैनी नज़र रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दूरसंचार विभाग के अनुसार ‘चक्षु’ पर दर्ज की जाने वाली शिकायतें विभाग को अवैध टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने और साइबर अपराधों की रोकथाम में अहम सुराग प्रदान करती हैं। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति पहले ही ठगी का शिकार हो चुका है, तो उसे 1930 पर कॉल करके या साइबर क्राइम पोर्टल पर जाकर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

‘चक्षु’ प्लेटफ़ॉर्म अवांछित विज्ञापन कॉल और SMS की शिकायतें भी दर्ज करता है। TRAI के 2018 के नियमन के तहत यदि कोई नागरिक सात दिनों के भीतर ऐसी स्पैम कॉल या संदेश की शिकायत दर्ज करता है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। सात दिनों के बाद की गई रिपोर्टें विभाग को संदिग्ध स्रोतों का विश्लेषण करने में मदद करती हैं, जिससे भविष्य में ऐसे स्पैमर्स पर नकेल कसी जा सके।

इतना ही नहीं, ‘चक्षु’ अब उन खतरनाक वेब लिंक्स की रिपोर्टिंग का भी माध्यम बन चुका है जो साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। फिशिंग लिंक, फ्रॉड APK, डिवाइस क्लोनिंग के प्रयास, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से भेजे गए संदिग्ध संदेश — नागरिक अब इन सभी की रिपोर्ट सीधे इस सुविधा पर कर सकते हैं। यह व्यवस्था डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

संचार साथी का एक अन्य उपयोगी पहलू ‘ब्लॉक योर लॉस्ट स्टोलन मोबाइल’ सुविधा है, जिसके माध्यम से कोई भी नागरिक अपने खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को सभी टेलीकॉम नेटवर्क पर ब्लॉक करा सकता है। इससे फोन का इस्तेमाल असंभव हो जाता है और यदि कोई उसे उपयोग करने की कोशिश करता है तो तुरंत उसकी ट्रेसिंग की जाती है। फोन वापस मिलने पर उसे अनब्लॉक भी किया जा सकता है।

पोर्टल मोबाइल नंबरों की वैधता की जांच, अवांछित कनेक्शनों की रिपोर्टिंग, मोबाइल हैंडसेट के IMEI की सत्यता, विदेशी कॉल को घरेलू नंबर की तरह दिखाकर की जा रही अवैध कॉलिंग की शिकायत और इंटरनेट सेवा प्रदाता की जानकारी जैसी सुविधाएँ भी प्रदान करता है।

सरकारी और वित्तीय संस्थानों के असली कस्टमर केयर नंबर, ईमेल और वेबसाइटों की ‘ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट डीटेल्स’ मॉड्यूल के माध्यम से नागरिक किसी भी संदिग्ध नंबर या लिंक की सच्चाई खुद जांच सकते हैं। यह सुविधा धोखाधड़ी को रोकने और नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

डिजिटल युग में जहाँ खतरे हर दरवाज़े पर दस्तक दे रहे हैं, वहीं ‘संचार साथी’ और ‘चक्षु’ जैसी पहलों ने सुरक्षा की एक मजबूत परत खड़ी कर दी है। यह पहल न सिर्फ नागरिकों को जागरूक बनाती है, बल्कि उन्हें देश के डिजिटल ढांचे का सक्रिय प्रहरी भी बनाती है।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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