भारत के ऊर्जा भविष्य को मिला नया सहारा? अंडमान के विजयपुरम-3 में मिला प्राकृतिक गैस का सुराग
अंडमान-निकोबार अपतटीय क्षेत्र के विजयपुरम-3 कुएं में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने प्राकृतिक गैस की पुष्टि की है। 15 किलोमीटर समुद्र तट से दूर, 355 मीटर जलगहराई और 1900 मीटर से अधिक गहराई में मिले इस हाइड्रोकार्बन संकेत से क्षेत्र की ऊर्जा संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के अपतटीय क्षेत्र में भारत की ऊर्जा खोज को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। राज्य के स्वामित्व वाली महारत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने बंगाल की खाड़ी में स्थित श्री विजयपुरम-3 अन्वेषणात्मक कुएं में प्राकृतिक गैस की उपस्थिति की पुष्टि की है। यह कुआं अंडमान द्वीपों के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है और क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन संभावनाओं को लेकर नई उम्मीदें जगा रहा है।
कंपनी द्वारा बीएसई और एनएसई को दी गई नियामकीय जानकारी के अनुसार, यह कुआं “विजयपुरम-3 (Loc. OAEB)” अंडमान अपतटीय ब्लॉक AN-OSHP-2018/1 के अंतर्गत ड्रिल किया गया है, जो ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) के तहत आता है। इस कुएं की ड्रिलिंग लगभग 355 मीटर जलगहराई (water depth) में की गई है, जो इसे गहरे समुद्री अन्वेषण अभियान का हिस्सा बनाती है।
𝐍𝐚𝐭𝐮𝐫𝐚𝐥 𝐠𝐚𝐬 𝐝𝐢𝐬𝐜𝐨𝐯𝐞𝐫𝐞𝐝 𝐚𝐭 𝐒𝐫𝐢 𝐕𝐢𝐣𝐚𝐲𝐚𝐩𝐮𝐫𝐚𝐦-𝟑, 𝟏𝟓 𝐤𝐦 𝐨𝐟𝐟 𝐀𝐧𝐝𝐚𝐦𝐚𝐧 𝐈𝐬𝐥𝐚𝐧𝐝𝐬
— All India Radio News (@airnewsalerts) June 5, 2026
Minister for Petroleum and Natural Gas @HardeepSPuri announced that natural gas has been discovered at the Sri Vijayapuram-3, about 15 kilometres off… pic.twitter.com/bP8quBwgcw
ऑयल इंडिया लिमिटेड ने बताया कि परीक्षण के दौरान 1,900 मीटर से अधिक गहराई पर स्थित इओसीन (Eocene) संरचना में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी सामने आई। प्रारंभिक उत्पादन परीक्षण के समय लगातार फ्लेरिंग (continuous flaring) के माध्यम से गैस के स्पष्ट संकेत मिले। इसके बाद परफोरेशन प्रक्रिया के तुरंत बाद कुएं में दबाव तेजी से बढ़ा और उसने स्वयं उत्पादन शुरू कर दिया, जो सक्रिय हाइड्रोकार्बन प्रणाली का संकेत माना जाता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि ऑयल इंडिया लिमिटेड ने इस ब्लॉक के दूसरे अन्वेषणात्मक कुएं, विजयपुरम-2 (Loc. OAEA), में 26 सितंबर 2025 को पहली बार प्राकृतिक गैस की उपस्थिति की सूचना दी थी। अब तक इस ब्लॉक में ड्रिल किए गए तीन अन्वेषणात्मक कुओं में से दो में हाइड्रोकार्बन की पुष्टि हो चुकी है, जिससे क्षेत्र की भूगर्भीय क्षमता को लेकर वैज्ञानिक और औद्योगिक स्तर पर रुचि और बढ़ गई है।
अंडमान-निकोबार अपतटीय बेसिन को अभी भी अपेक्षाकृत कम अन्वेषित क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यहां मिलने वाले हाइड्रोकार्बन संकेत भारत की ऊर्जा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि यह खोज प्रारंभिक चरण में है और इसे अभी व्यावसायिक रूप से सिद्ध गैस भंडार (commercial reserves) नहीं माना गया है, लेकिन लगातार मिल रहे संकेत भविष्य की संभावनाओं को मजबूत कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि अंडमान क्षेत्र में चल रही अन्वेषण गतिविधियाँ भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यदि आगे के परीक्षणों में इन गैस संकेतों को व्यावसायिक उत्पादन योग्य भंडार के रूप में प्रमाणित किया जाता है, तो यह क्षेत्र देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक नए प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
