प्रकृति का मुकाबला AI से; नैसर्गिक आपदा से गूगल बचाएगा लोगों की जानें
गूगल ने अपनी अर्थ ऐप में जेमिनी AI को जोड़ दिया है, जो अब प्राकृतिक आपदाओं का अनुमान लगा सकेगी। यह बताने में भी सक्षम है कि किसी आपदा से कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं।

आधुनिक युग में AI यह शब्द काफी प्रचलित होता हुआ हमें नजर आ रहा है। AI याने कृत्रिम बुद्धिमत्ता जिसे हम अंग्रेजी में आर्टिफिशल इंटलिजन्स भी कहते है। आज इस क्षेत्र में बड़े बदलाव हमें नजर आ रहे है। AI का उपयोग हमें हर जगह देखने को मिल रहा है। ऐसे में ही AI अब हमे नैसर्गिक आपदा के बारे में भी आगा करने वाला है।प्राकृतिक आपदाओं से लोगों को बचाना अब और आसान हो सकता है। गूगल ने अपनी Earth ऐप में Gemini AI को शामिल किया है, जो सैटेलाइट, मौसम और जनसंख्या डेटा का इस्तेमाल करके आपदाओं का पूर्वानुमान लगा सकती है। यह सिर्फ यह नहीं बताएगी कि कोई तूफान या बाढ़ किस इलाके को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी अंदाजा लगाएगी कि कितने लोग इस आपदा की चपेट में आ सकते हैं।
यह तकनीक जियोस्पेटियल रीजनिंग पर आधारित है। AI मैप्स, मौसम की जानकारी, जनसंख्या घनत्व और इलाके की इमारतों का डेटा स्टडी करके अनुमान लगाती है। यानी किसी इलाके में तूफान या बाढ़ जैसी स्थिति में कितनी नुकसान संभावना है, इसका अंदाजा भी जल्द ही लगाया जा सकता है।
Gemini AI आम लोगों के लिए भी उपयोगी है। उदाहरण के लिए, अगर कोई जानना चाहता है कि कोई नदी कहां सूख रही है, तो AI सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर तुरंत जवाब दे सकती है। इसके साथ ही यह ऐप राहत कार्यों में लगे एजेंसियों और सरकारों को स्थिति बिगड़ने से पहले तैयारी का समय भी दे सकती है।
गूगल ने इसे क्लाउड पर भी उपलब्ध कराया है, ताकि सरकारें और कंपनियां अपने डेटा में इसे इंटीग्रेट कर सके। कंपनी का मकसद सिर्फ पूर्वानुमान देना नहीं है, बल्कि आपदा प्रभावित लोगों की सुरक्षा और बचाव में मदद करना भी है। इस अपडेट के साथ अब आपदाओं की चेतावनी, प्रभावित इलाकों की जानकारी और राहत के लिए तैयारी करना पहले से काफी आसान हो जाएगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
