कार्ल बेंज के पेटेंट के 140 वर्ष पूरे होने पर तीन एस-क्लास लिमोजीन कारें भारत के विभिन्न शहरों और हिमालय के दुर्गम रास्तों से होकर गुजरेंगी।

तस्वीर में बंदरगाह के पास स्थित पार्किंग क्षेत्र में दो मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास कारें और एक पुरानी विंटेज कार खड़ी दिखाई दे रही हैं।
मर्सिडीज-बेंज की ऐतिहासिक '140 इयर्स. 140 प्लेसेस' ट्रांसकॉन्टिनेंटल ड्राइव जुलाई माह में भारत पहुँच रही है। यह विश्व भ्रमण वर्ष 1886 में जर्मनी में कार्ल बेंज द्वारा पहली ऑटोमोबाइल के पेटेंट पंजीकरण के 140 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत, गोटलिएब, कार्ल और बर्था नामक तीन एस-क्लास लिमोजीन कारें छह महाद्वीपों और 55 से अधिक देशों में 60,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए दुनिया भर का भ्रमण कर रही हैं।
भारत में ये लिमोजीन दो विशिष्ट मार्गों पर यात्रा करेंगी। गोटलिएब अपनी यात्रा नई दिल्ली से प्रारंभ कर अमृतसर जाएगी, जिसके पश्चात यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में प्रवेश करेगी। अपनी यात्रा के दौरान यह कार विश्व के सबसे ऊंचे मोटरेबल पास, उमलिंग ला को भी पार करेगी। हिमालय की ऊंचाइयों से नीचे उतरते हुए, गोटलिएब मैदानी इलाकों की ओर रुख करेगी और लखनऊ, वाराणसी तथा पटना होते हुए भूटान में प्रवेश करेगी, जिसके बाद यह वापस दिल्ली लौटेगी।
वहीं, कार्ल और बर्था दिल्ली से प्रस्थान कर पश्चिम और दक्षिण की ओर बढ़ेंगी, जहाँ से वे आगरा, जयपुर, उदयपुर और अहमदाबाद होते हुए पुणे पहुंचेंगी। पुणे से, इनमें से एक कार मुंबई जाएगी, जबकि दूसरी कार हम्पी के रास्ते दक्षिण में बैंगलोर की ओर अपनी यात्रा जारी रखेगी। अंत में, यह कार गोवा के तटीय मार्ग से होते हुए वापस मुंबई पहुँचेगी। ऑटोमोबाइल जगत के इस ऐतिहासिक आयोजन का भारत में आगमन न केवल तकनीकी नवाचार के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करता है, बल्कि यह यात्रा मर्सिडीज-बेंज की विरासत और भविष्य की निरंतरता का एक जीवंत प्रमाण भी है।

