महिंद्रा की नई इलेक्ट्रिक SUV कूपे XEV 9e, जो वर्ष 2024 के अंत में लॉन्च की गई और जिसकी कीमत लगभग ₹19 लाख से लेकर ₹30 लाख से अधिक (एक्स-शोरूम) तक जाती है, इन दिनों अपने स्पेयर व्हील को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गई है। यह वाहन ब्रांड की प्रीमियम इलेक्ट्रिक एसयूवी लाइनअप का हिस्सा है और आधुनिक EV प्लेटफॉर्म पर आधारित है, लेकिन इसके स्पेयर टायर डिजाइन ने उपयोगकर्ताओं और ऑटो विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

वाहन में दिए गए स्पेयर व्हील का आकार T135/80 R18 स्पेस-सैवर टायर है, जो इसके मुख्य 245/55 R19 अलॉय व्हील्स की तुलना में काफी छोटा है। इसे बूट फ्लोर के नीचे फिट किया गया है, जिससे बूट स्पेस तो बचता है, लेकिन इसके व्यावहारिक उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।

कुछ उपयोगकर्ताओं और आलोचकों का कहना है कि यह स्पेयर व्हील हाईवे या दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं है, क्योंकि यह केवल आपात स्थिति में सीमित उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है। आम तौर पर इसे लगभग 80 किमी/घंटा की सीमित गति और करीब 100 किलोमीटर तक की दूरी तय करने के लिए ही उपयुक्त माना जाता है।



हालांकि, इस मुद्दे पर समर्थन में भी आवाजें उठ रही हैं। ऑटोमोटिव पत्रकार साइरस धाभर (Cyrus Dhabhar) सहित कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक मानक स्पेस-सैवर समाधान है, जिसका उद्देश्य केवल वाहन को निकटतम वर्कशॉप तक सुरक्षित रूप से पहुंचाना होता है। उनका यह भी कहना है कि ऐसी व्यवस्था केवल महिंद्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि बीएमडब्ल्यू जैसी कई लग्जरी कंपनियां भी इसी तरह के समाधान का उपयोग करती हैं।

कंपनी की तरफ से इस डिजाइन के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी पैक नीचे फ्लोर में होने के कारण स्पेस की सीमाएं रहती हैं, ऐसे में हल्के और छोटे स्पेयर व्हील का उपयोग करना जरूरी हो जाता है। इससे न केवल बूट स्पेस बेहतर होता है, बल्कि वाहन का कुल वजन भी नियंत्रित रहता है, जो EV की रेंज और एफिशिएंसी को प्रभावित करता है।

ऑटो इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक स्तर पर अब कई इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता या तो स्पेस-सैवर टायर देते हैं या फिर पूरी तरह से टायर रिपेयर किट पर निर्भर रहते हैं। कई प्रतिस्पर्धी मॉडल तो स्पेयर व्हील को पूरी तरह हटा चुके हैं ताकि अधिक बूट स्पेस उपलब्ध हो सके। वहीं XEV 9e के उपयोगकर्ताओं का एक वर्ग यह भी मानता है कि ₹20 लाख से अधिक कीमत वाले प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV से पूर्ण आकार का स्पेयर व्हील अपेक्षित था, खासकर उन परिस्थितियों में जहां लंबी दूरी की यात्रा आम है और तुरंत सर्विस सुविधा उपलब्ध नहीं होती।

महिंद्रा XEV 9e को भारतीय बाजार में BYD Atto 3 और आने वाले टाटा के इलेक्ट्रिक एसयूवी मॉडलों जैसी गाड़ियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इसके स्पेयर टायर को लेकर उठी यह बहस न केवल डिजाइन फिलॉसफी पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोगिता और सुरक्षा के संतुलन पर भी नई चर्चा को जन्म दे रही है।

Updated On
Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story