भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग: Make in India ने बदल दी इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की तस्वीर
पिछले 11 वर्षों में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में छः गुना और निर्यात में आठ गुना वृद्धि दर्ज की है। Atma Nirbhar Bharat और Make in India के तहत सरकार ने पूरी आपूर्ति श्रृंखला में निवेश कर तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है।

Make in India
पिछले 11 वर्षों में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया है। आत्म निर्भर भारत और Make in India की दूरदर्शी नीतियों के तहत देश ने न केवल घरेलू मांग पूरी करने में सफलता पाई है, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी पहचान भी मजबूत की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण छह गुना बढ़ा है, जबकि निर्यात आठ गुना बढ़कर देश की आर्थिक ताकत में नई इबारत जोड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उन्नति केवल उद्योगपतियों और निवेशकों की भागीदारी का परिणाम नहीं है, बल्कि सरकार की पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला—कच्चे माल से लेकर उच्च तकनीक सेमीकंडक्टर तक को विकसित करने की रणनीति का भी परिणाम है। केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं और प्रोत्साहनों के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल आत्म निर्भर भारत और Make in India ने विदेशी निर्भरता को कम करने और घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इसी कड़ी में भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण, मोबाइल और कंप्यूटर घटक, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, और अन्य हाई-टेक उपकरणों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए रणनीतिक निवेश और नीति समर्थन सुनिश्चित किया है।
सरकार ने इस क्षेत्र में निवेशकों के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र, कर प्रोत्साहन, और तकनीकी सहयोग की सुविधाएँ उपलब्ध करवाई हैं। इसके साथ ही डिजिटल भारत और स्मार्ट शहर परियोजनाओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग को बढ़ावा दिया गया है, जिससे घरेलू उत्पादन का लाभ सीधे देश की अर्थव्यवस्था में दिखाई दे रहा है।
विशेष रूप से, सेमीकंडक्टर उत्पादन में भारत ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यह कदम केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित नहीं करता, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार सृजन और निवेश के अवसर भी बढ़ाता है। साथ ही, यह इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में भारत को एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दशक में निर्यात में आठ गुना वृद्धि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का स्पष्ट संकेत है। घरेलू उत्पादन में वृद्धि ने न केवल विदेशी उत्पादों पर निर्भरता घटाई है, बल्कि तकनीकी नवाचार और गुणवत्ता मानकों को भी बढ़ावा दिया है।
अंततः, यह बदलाव भारत के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य को नए आयाम दे रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में छः गुना वृद्धि और निर्यात में आठ गुना वृद्धि केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह देश की आत्मनिर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, और तकनीकी उन्नति की कहानी कहता है। भविष्य में, सरकार की योजनाएँ और निवेश इस क्षेत्र को और अधिक विकसित और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
