AI की जंग में मारी बाजी; विकासशील देशों के लिए भारत बना डिजिटल 'बैकबोन'
IMF प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने भारत को बताया AI क्रांति का नायक। जानें कैसे भारत विकासशील देशों के लिए तकनीक सुलभ बना रहा है और क्या हैं भविष्य की चुनौतियां।

Asia in 2050 Conference : वैश्विक पटल पर भारत की तकनीकी धमक अब एक नई ऊंचाई को छू रही है। बैंकॉक में आयोजित प्रतिष्ठित 'एशिया इन 2050 कॉन्फ्रेंस' (Asia in 2050 Conference) के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने भारत के डिजिटल नेतृत्व का लोहा मानते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत न केवल अपनी सीमाओं के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्रांति ला रहा है, बल्कि वह इस जटिल तकनीक को दुनिया भर के विकासशील देशों के लिए सुलभ और किफायती बनाने में एक 'टॉर्चबियरर' (मशालची) की भूमिका निभा रहा है।
एशियाई अर्थव्यवस्था का 'गेमचेंजर' बनेगा AI :
जॉर्जीवा के संबोधन में एशिया के आर्थिक भविष्य को लेकर एक गहरा विश्वास झलका। उन्होंने रेखांकित किया कि यदि एशियाई देश उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का प्रभावी और रणनीतिक उपयोग करते हैं, तो यह क्षेत्र की वार्षिक आर्थिक विकास दर में लगभग एक प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि कर सकता है। इस बदलाव के केंद्र में भारत है, जिसका विशाल डिजिटल इकोसिस्टम, तेजी से उभरता तकनीकी क्षेत्र और विशाल युवा कार्यबल दुनिया के लिए एक उदाहरण पेश कर रहा है।
आईएमएफ प्रमुख के अनुसार, एआई के प्रभाव को निम्नलिखित क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है:
प्रभाव का क्षेत्र | विवरण | संभावित लाभ |
आर्थिक विकास | वार्षिक जीडीपी में वृद्धि | +1% प्रति वर्ष (अनुमानित) |
उत्पादकता | कार्यों का ऑटोमेशन और गति | कार्यक्षमता में भारी सुधार |
समावेशिता | विकासशील देशों तक पहुंच | तकनीक का लोकतंत्रीकरण |
रोजगार पर 'ऑटोमेशन' की छाया: एक गंभीर चेतावनी
जहाँ एक ओर तकनीक के लाभ गिनाए गए, वहीं जॉर्जीवा ने श्रम बाजार में आने वाले बड़े व्यवधानों को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने एक सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए बताया कि एआई के बढ़ते कदम मध्यम स्तर की नौकरियों पर भारी दबाव डाल सकते हैं। विशेष रूप से 'एंट्री-लेवल' की नौकरियां, जिनमें दोहराव वाले (Repetitive) कार्य अधिक होते हैं, उनके स्वचालित होने का खतरा सबसे अधिक है।
श्रम बाजार पर एआई के प्रभाव का अनुमानित वितरण कुछ इस प्रकार देखा जा सकता है:
- उच्च कौशल (High Skill) : मांग में वृद्धि और वेतन में सुधार।
- मध्यम कौशल (Middle Skill) : ऑटोमेशन के कारण नौकरियों पर सबसे अधिक खतरा।
- कम कौशल (Low Skill) : शारीरिक श्रम वाले कार्यों में मांग स्थिर, लेकिन अनिश्चितता।
IMF प्रमुख ने इस डिजिटल संक्रमण को सफल बनाने के लिए सरकारों को स्पष्ट नीतिगत सुझाव भी दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई से होने वाली आर्थिक प्रगति का लाभ केवल वही देश उठा पाएंगे जो डिजिटल अवसंरचना में निवेश करेंगे और अपने कार्यबल को 'री-स्किल' यानी फिर से प्रशिक्षित करेंगे। उन्होंने कहा कि जो देश समय रहते अपने लोगों में निवेश करेंगे और सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देंगे, वही इस आर्थिक लहर पर सवार हो पाएंगे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
