भारत सरकार ने IN-SPACe और अंतरिक्ष विभाग के माध्यम से गुजरात और तमिलनाडु में दो अत्याधुनिक स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने को मंजूरी दी है। ये केंद्र रॉकेट और सैटेलाइट निर्माण, टेस्टिंग और असेंबली को बढ़ावा देंगे, जिससे निजी अंतरिक्ष उद्योग को मजबूती मिलेगी।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम के तहत सरकार ने दो अत्याधुनिक स्पेस मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग क्लस्टर्स की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय देश के निजी अंतरिक्ष उद्योग को मजबूती देने और अत्यधिक केंद्रीकृत ढांचे पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी पहल माना जा रहा है।

यह योजना भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है। इन दोनों हब्स को कॉमन टेक्निकल फैसिलिटीज (CTFs) के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप और निजी कंपनियां बिना भारी-भरकम लागत वाले बुनियादी ढांचे का निर्माण किए सीधे उच्च स्तरीय परीक्षण, डिजाइन और असेंबली की सुविधा प्राप्त कर सकेंगी।

गुजरात में स्थापित होने वाला स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क अहमदाबाद के पास खोराज क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यह केंद्र मुख्य रूप से उपग्रहों के डिजाइन, पेलोड इंटीग्रेशन, अंतरिक्ष यान के संरचनात्मक परीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक्स और सब-सिस्टम विकास के साथ-साथ स्पेस-ग्रेड मटेरियल्स के परीक्षण पर केंद्रित रहेगा। इस हब को एक मजबूत अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जो उपग्रह निर्माण से जुड़े विभिन्न घटकों के उत्पादन में साझा इकोसिस्टम प्रदान करेगा।

वहीं, तमिलनाडु के तूतीकोरिन (Thoothukudi) क्षेत्र में स्थापित होने वाला स्पेस व्हीकल्स क्लस्टर रॉकेट और लॉन्च व्हीकल्स के विकास पर केंद्रित होगा। यहां लॉन्च व्हीकल असेंबली और इंटीग्रेशन, प्रोपल्शन सिस्टम टेस्टिंग, वाइब्रेशन टेस्ट, थर्मल वैक्यूम परीक्षण और लॉन्च रेडीनेस वेरिफिकेशन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह केंद्र रॉकेट निर्माण और परीक्षण की पूरी प्रक्रिया को एक ही स्थान पर सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इन दोनों हब्स की सबसे बड़ी विशेषता इनका प्लग-एंड-प्ले इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, जिसके माध्यम से स्टार्टअप्स और कंपनियों को महंगे उपकरणों और प्रयोगशालाओं पर अलग से निवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा, इन सुविधाओं को साझा उपयोग के आधार पर विकसित किया जाएगा, जिससे लागत और समय दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह ढांचा न केवल निजी कंपनियों के लिए बल्कि शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

इन हब्स को भारत की मौजूदा अंतरिक्ष व्यवस्था से जोड़ा जाएगा, जिसका नेतृत्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) करता है। यह एकीकृत संरचना देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को और अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाएगी। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत में निजी अंतरिक्ष उद्योग को गति देना, अंतरिक्ष क्षेत्र को विकेंद्रीकृत करना, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाना तथा रोजगार और निवेश के नए अवसर उत्पन्न करना है। इस कदम से भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story