भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 10 निर्माण इकाइयों को मंजूरी दी है। ₹1.6 लाख करोड़ निवेश वाली इस पहल से देश में फैब्स, ATMP/OSAT और उन्नत चिप तकनीक का विकास होगा, जिससे भारत आत्मनिर्भर चिप इकोसिस्टम की ओर तेजी से बढ़ेगा।

भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रगति दर्ज करते हुए “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन” के तहत 10 सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय देश के तकनीकी और औद्योगिक भविष्य के लिए एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण हब के रूप में स्थापित करना है।

सरकारी पहल के तहत स्वीकृत इन परियोजनाओं में विभिन्न प्रकार की अत्याधुनिक इकाइयाँ शामिल हैं, जिनमें चिप निर्माण के लिए फैब्रिकेशन प्लांट्स यानी फैब्स, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP/OSAT) यूनिट्स, तथा विशेष प्रकार की सेमीकंडक्टर तकनीक से जुड़ी इकाइयाँ शामिल हैं। फैब्स को सेमीकंडक्टर उत्पादन की रीढ़ माना जाता है, जहाँ सिलिकॉन वेफर्स से वास्तविक चिप्स का निर्माण किया जाता है। भारत में अब तक इस क्षेत्र में सीमित फ्रंट-एंड क्षमता रही है, ऐसे में इन इकाइयों की मंजूरी को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वहीं ATMP और OSAT यूनिट्स चिप निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं, जहाँ तैयार चिप्स को पैक किया जाता है, उनकी गुणवत्ता की जांच की जाती है और उन्हें उपयोग योग्य बनाया जाता है। यह प्रक्रिया फैब्स की तुलना में अपेक्षाकृत तेज़ और लागत प्रभावी होती है, जिससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में तेजी से अपनी जगह बना सकता है।



इन परियोजनाओं में कंपाउंड सेमीकंडक्टर इकाइयाँ भी शामिल हैं, जो विशेष रूप से सिलिकॉन कार्बाइड जैसी उन्नत तकनीक पर आधारित होती हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा उपकरणों और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। इसके साथ ही मिनी और माइक्रो एलईडी जैसे डिस्प्ले तकनीक से जुड़ी उन्नत विनिर्माण इकाइयाँ भी इस मिशन का हिस्सा हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन सभी 10 सेमीकंडक्टर इकाइयों में लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है, जो भारतीय मुद्रा और वैश्विक डॉलर दोनों में इस क्षेत्र के लिए एक विशाल आर्थिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह निवेश विभिन्न निजी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से किया जा रहा है तथा केंद्र और राज्य सरकारों की प्रोत्साहन योजनाओं से समर्थित है।

इन परियोजनाओं का विस्तार देश के कई प्रमुख राज्यों में किया जा रहा है, जिनमें गुजरात, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पंजाब शामिल हैं। गुजरात के धोलेरा को सेमीकंडक्टर निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों में भी औद्योगिक आधारभूत संरचना को तेजी से मजबूत किया जा रहा है। इन 10 इकाइयों के अंतर्गत बड़े पैमाने पर फैब परियोजनाएँ, कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयाँ, डिस्प्ले और एलईडी चिप निर्माण संयंत्र तथा पैकेजिंग एवं टेस्टिंग सुविधाएँ शामिल हैं, जो मिलकर भारत में एक पूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम करेंगी।

यह पूरा मिशन न केवल आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है, बल्कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत दावेदार बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके साथ ही यह पहल रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विस्तार को भी नई गति देने की क्षमता रखती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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