क्या अब नन्हे रोबोट बनाएंगे आपका आशियाना? IIT मद्रास और हार्वर्ड ने कर दिखाया चमत्कार!
चींटियों की कार्यप्रणाली से प्रेरित यह रोबोटिक तकनीक बिना किसी मानवीय निर्देश के मंगल और चंद्रमा पर इमारतें खड़ी करने में सक्षम है।

हार्वर्ड और IIT मद्रास द्वारा विकसित RAnts रोबोट का प्रतिरूप जो चींटियों की तरह सामूहिक रूप से निर्माण कार्य को दर्शा रहा है।
विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी अध्याय जुड़ने जा रहा है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने मिलकर 'RAnts' नामक ऐसे नन्हे रोबोट विकसित किए हैं, जो जटिल निर्माण कार्यों को बिल्कुल उसी तरह अंजाम दे सकते हैं जैसे चींटियां या दीमक अपना घर बनाते हैं। 'एक्सबॉडीड इंटेलिजेंस' (Embodied Intelligence) पर आधारित यह तकनीक भविष्य में निर्माण उद्योग की परिभाषा बदलने का माद्दा रखती है।
इन रोबोट्स की सबसे बड़ी खूबी इनका सामूहिक तालमेल है। आमतौर पर रोबोटिक प्रणालियों को किसी सेंट्रल कमांड या इंसानी निर्देश की आवश्यकता होती है, लेकिन RAnts पूरी तरह से स्वायत्त हैं। वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को 'स्टिगर्मी' (Stigmergy) नाम दिया है। जिस प्रकार असली चींटियां फेरोमोन नामक रसायन के माध्यम से एक-दूसरे को रास्ता बताती हैं, ये रोबोट 'फोटोर्मोन' (Photormone) तकनीक का उपयोग करते हैं। इसमें एक रोबोट प्रकाश के संकेत छोड़ता है, जिसे देखकर समूह के अन्य रोबोट समझ जाते हैं कि अगले कदम में कहां निर्माण करना है या कहां से सामग्री हटानी है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। मंगल या चंद्रमा जैसे ग्रहों पर, जहां का वातावरण इंसानों के लिए अत्यधिक खतरनाक है, वहां ये नन्हे इंजीनियर बुनियादी ढांचे तैयार करने में सक्षम होंगे। रेडिएशन, ऑक्सीजन की कमी और विषम तापमान के बीच ये रोबोट बिना थके इंसानों के बसने से पहले वहां रहने योग्य बस्तियां खड़ी कर सकते हैं। यह प्रयोग न केवल रोबोटिक्स की दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर निर्माण की चुनौतियों का स्थायी समाधान भी पेश करता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
