सुरक्षा और सुविधा एक साथ: गूगल वॉलेट में जुड़ा आधार कार्ड का फीचर, एक टैप में होगा वेरिफिकेशन।
एंड्रॉइड 9 और स्क्रीन लॉक जैसी शर्तों के साथ गूगल वॉलेट में स्टोर करें डिजिटल आधार, सुरक्षित एन्क्रिप्शन के साथ आसान होगा वेरिफिकेशन।

स्मार्टफोन पर डिजिटल आधार कार्ड का उपयोग करता एक युवा, जो गूगल वॉलेट में नई सुविधा के जुड़ने के बाद पहचान सत्यापन को दर्शा रहा है।
नई दिल्ली: सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्रांति के इस दौर में भारत ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। वैश्विक दिग्गज कंपनी गूगल ने भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अपने 'गूगल वॉलेट' (Google Wallet) ऐप में आधार कार्ड को एकीकृत करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस नई सुविधा के बाद अब करोड़ों भारतीयों को अपना फिजिकल आधार कार्ड हर समय साथ लेकर चलने की विवशता से मुक्ति मिल जाएगी। यह कदम न केवल दैनिक जीवन को सुगम बनाएगा, बल्कि डिजिटल पहचान के प्रबंधन को एक नई और सुरक्षित दिशा भी प्रदान करेगा।
गूगल वॉलेट में आधार कार्ड को शामिल करने की यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षा मानकों और एन्क्रिप्शन तकनीकों पर आधारित है। गूगल ने स्पष्ट किया है कि इस फीचर का लाभ उठाने के लिए उपयोगकर्ताओं के पास कम से कम एंड्रॉइड 9 ऑपरेटिंग सिस्टम वाला स्मार्टफोन होना अनिवार्य है। सुरक्षा को प्राथमिक स्तर पर रखते हुए, फोन में स्क्रीन लॉक जैसे कि पिन, पैटर्न या बायोमेट्रिक्स का सक्रिय होना भी एक अनिवार्य शर्त बनाई गई है। यह सुनिश्चित करता है कि उपयोगकर्ता का संवेदनशील डेटा किसी भी स्थिति में अनधिकृत हाथों में न जाए। इसके साथ ही, फोन में आधिकारिक आधार ऐप का होना भी इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक है।
गूगल वॉलेट में आधार कार्ड जोड़ने की विधि को बेहद सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले गूगल वॉलेट ऐप खोलकर लॉगइन करना होगा, जिसके बाद 'Add' बटन पर टैप करने पर 'Aadhaar' का विकल्प दिखाई देगा। इस विकल्प का चयन करते ही उपयोगकर्ता सीधे आधिकारिक आधार ऐप पर पहुंच जाएंगे, जहां पहचान सत्यापन के बाद 'Add to Wallet' का चुनाव करना होगा। अंत में, गूगल वॉलेट का चयन कर 'Continue' दबाने पर कुछ समय के लिए आवेदन की समीक्षा की जाएगी और फिर आधार कार्ड डिजिटल रूप में वॉलेट में प्रदर्शित होने लगेगा। यह पूरी प्रक्रिया कागजी झंझटों को खत्म कर तकनीक के माध्यम से पहचान साझा करने का एक आधुनिक तरीका है।
इस डिजिटल नवाचार के फायदे केवल पोर्टेबिलिटी तक सीमित नहीं हैं। उपयोगकर्ता अब जरूरत पड़ने पर क्यूआर (QR) कोड या एनएफसी (NFC) तकनीक के माध्यम से अपनी पहचान साझा कर सकेंगे। प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए, किसी भी डेटा को साझा करने से पहले उपयोगकर्ता को उसे रिव्यू और अप्रूव करना होगा। यह डिजिटल कॉपी हवाई अड्डों, होटलों और अन्य सरकारी व निजी संस्थानों में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह के सत्यापन के काम आएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल सुविधा फिजिकल कार्ड का एक अतिरिक्त विकल्प है, जो रोजमर्रा के कार्यों में गति प्रदान करेगी।
गूगल वॉलेट में आधार कार्ड का आना केवल एक तकनीकी अपडेट नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर और डिजिटल होते भारत की बदलती तस्वीर का प्रतिबिंब है। जहां सुरक्षा और सुगमता एक ही मंच पर मिल रहे हैं, वहां समय की बचत और डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित होना ही इस नवाचार की असली सफलता है। आने वाले समय में, यह फीचर भारतीय नागरिकों के लिए अनिवार्य डिजिटल टूल साबित होगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
