28 पुरानी बसें बनीं चलती-फिरती स्कूल ; गुजरात की सोलर क्लासरूम पहल ने बदली तस्वीर
गुजरात सरकार ने 28 सेवानिवृत्त GSRTC बसों को सोलर-पावर्ड मोबाइल क्लासरूम में बदलकर “रणशाला – स्कूल ऑन व्हील्स” योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य कच्छ, सुरेन्द्रनगर, पाटण और मोरबी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के अगरिया बच्चों तक शिक्षा पहुँचाना है, जिससे ड्रॉपआउट दर कम हो और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित हो सके।

गुजरात में रणशाला पहल की शुरुआत
गुजरात सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव और दूरदर्शी कदम उठाते हुए राज्य की पुरानी और सेवानिवृत्त राज्य परिवहन (GSRTC) बसों को आधुनिक सौर ऊर्जा संचालित मोबाइल कक्षाओं में परिवर्तित कर दिया है। इस अनूठी पहल को “रणशाला – स्कूल ऑन व्हील्स” नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य उन बच्चों तक शिक्षा पहुँचाना है जो दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में रहते हैं तथा जिनकी पढ़ाई अक्सर मौसमी पलायन और संसाधनों की कमी के कारण बाधित हो जाती है।
इस परियोजना के तहत कुल 28 पुरानी बसों को पूरी तरह से पुनर्निर्मित कर उन्हें चलती-फिरती कक्षाओं का स्वरूप दिया गया है। इन बसों को विशेष रूप से राज्य के उन क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है जहाँ नमक उत्पादन से जुड़े समुदाय, विशेषकर अगरिया परिवार, निवास करते हैं और जहाँ शिक्षा की पहुँच सीमित रही है। इन मोबाइल क्लासरूम का मुख्य उद्देश्य सुरेन्द्रनगर, पाटण, कच्छ और मोरबी जैसे जिलों के उन बच्चों को नियमित शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो अक्सर अपने परिवारों के साथ मौसमी काम के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं। इनमें सुरेन्द्रनगर (पाटड़ी तालुका) में 20 बसें, पाटण (संतालपुर) में 4 बसें, कच्छ (अंजार) में 2 बसें तथा मोरबी (मालिया) में 2 बसें शामिल हैं।
इन बसों को पूरी तरह से आधुनिक शिक्षण सुविधाओं से लैस किया गया है। प्रत्येक बस में सौर ऊर्जा आधारित 3.8 केवीए ऑफ-ग्रिड सिस्टम लगाया गया है, जो 48 घंटे तक बिना किसी बाहरी बिजली स्रोत के निर्बाध संचालन सुनिश्चित करता है। साथ ही, स्मार्ट टीवी, डिजिटल शिक्षण सामग्री, पुस्तकें और अन्य शैक्षणिक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं ताकि बच्चों को डिजिटल और पारंपरिक दोनों माध्यमों से शिक्षा दी जा सके।
प्रत्येक बस को एक पूर्ण विकसित कक्षा के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें पोर्टेबल अध्ययन टेबल और बैठने की व्यवस्था, शिक्षक के लिए अलग कक्ष, पुस्तकालय कॉर्नर, ब्लैकबोर्ड और व्हाइटबोर्ड जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, वॉश बेसिन और बाहरी अध्ययन के लिए फोल्डेबल शेड नेट जैसी व्यवस्थाएँ भी की गई हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए इन मोबाइल कक्षाओं में खेल और मनोरंजन की सुविधाएँ भी जोड़ी गई हैं, जिनमें लूडो और स्नेक्स एंड लैडर्स जैसे पारंपरिक खेल, बास्केटबॉल उपकरण, झूले और स्लाइड जैसी बाहरी गतिविधियाँ तथा समय और गणितीय समझ विकसित करने के लिए मॉडल क्लॉक्स शामिल हैं।
इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य 6 से 14 वर्ष की आयु के उन बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है, जो नमक-खेतों में काम करने वाले अगरिया परिवारों से आते हैं और जिनकी शिक्षा अक्सर पलायन, भौगोलिक दूरी और स्कूलों की अनुपलब्धता के कारण प्रभावित होती है। प्रत्येक बस में 20 से अधिक छात्रों के बैठने की क्षमता है, जिससे एक साथ कई बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा सकती है।
यह संपूर्ण पहल शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा अभियान और गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) के संयुक्त सहयोग से लागू की गई है। सरकारी अधिकारियों द्वारा इस योजना का उद्देश्य स्पष्ट रूप से बच्चों के बीच शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना, ड्रॉपआउट दर को कम करना और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा को हर बच्चे तक पहुँचाना बताया गया है।
गुजरात की यह रणशाला पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचार के रूप में देखी जा रही है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे संसाधनों के पुनः उपयोग और तकनीकी समावेशन के माध्यम से सामाजिक चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है। यह परियोजना आने वाले समय में ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा पहुँचाने के मॉडल के रूप में एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित कर सकती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
