India AI Global Leadership : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) वर्तमान में वैश्विक स्तर पर एक ऐसी परिवर्तनकारी तकनीक के रूप में उभर रहा है, जो टिकाऊ शहरों के निर्माण से लेकर जटिल वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा और दशा को बदलने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की प्रतिष्ठित ‘एनुअल मीटिंग ऑफ द न्यू चैंपियंस’ यानी समर दावोस सम्मेलन के दौरान वैश्विक तकनीकी दिग्गजों और नीति-निर्माताओं ने एक सुर में यह स्वीकार किया है कि भारत का विशाल, युवा और कुशल टैलेंट पूल उसे वैश्विक एआई इकोसिस्टम में एक अग्रणी और नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार करता है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि एआई तकनीक न केवल वैश्विक स्तर पर विभिन्न उद्योगों के पारंपरिक स्वरूप को बदल रही है, बल्कि दुनिया के सामने मौजूद बड़ी पर्यावरणीय और वैज्ञानिक चुनौतियों के सटीक समाधान खोजने में भी एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।

इस तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन के दौरान तकनीकी नवाचारों और व्यावहारिक समाधानों पर गहन मंथन हुआ। ‘इंट्यूटिव एआई’ के सह-संस्थापक विवेक व्यास ने इस मंच पर अपनी कंपनी द्वारा विकसित किए गए आधुनिक एआई आधारित वेस्ट मैनेजमेंट समाधानों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसका प्राथमिक उद्देश्य दुनिया भर के शहरों को अधिक स्वच्छ, स्मार्ट और टिकाऊ बनाना है। कनाडा स्थित यह अग्रणी कंपनी पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल तरीके से कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और कुशल निपटान के लिए एआई एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर रही है। कंपनी का यह स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम विशेष रूप से हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बड़े शॉपिंग मॉल और अन्य अत्यधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस तकनीकी संदर्भ को जोड़ते हुए विवेक व्यास ने जोर देकर कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत इसका युवा, कुशल और अत्यधिक बुद्धिमान कार्यबल है, जो भविष्य में वैश्विक एआई नवाचारों की पूरी कमान संभालेगा।

तकनीकी विकास के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के क्षेत्र में भी एआई एक अभूतपूर्व क्रांति का सूत्रपात कर रहा है। एटिनरी टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. हरमन ट्राइबुकैट ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि एआई वैज्ञानिकों को बहुत तेजी से नए समाधान खोजने, शोध कार्यों की पारंपरिक गति को कई गुना बढ़ाने और जटिल वैज्ञानिक समस्याओं को अधिक कुशलता से हल करने में सक्षम बना रहा है। उनके अनुसार, इस तेज वैज्ञानिक नवाचार का सीधा और सबसे बड़ा लाभ वैश्विक स्वास्थ्य, उन्नत दवा अनुसंधान, स्वच्छ ऊर्जा और आम जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने वाले अन्य सामाजिक क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। उन्होंने इस बात पर भी विशेष बल दिया कि विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का यह संयुक्त विकास हमेशा मानवता के व्यापक और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर ही संचालित किया जाना चाहिए।

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लगातार मजबूत होते इनोवेशन इकोसिस्टम की चौतरफा सराहना की गई। डॉ. ट्राइबुकैट ने देश के उभरते नवाचार तंत्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत में प्रतिभाशाली इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और युवा नवप्रवर्तकों का एक अभूतपूर्व और बड़ा समूह मौजूद है, जो आने वाले समय में अत्याधुनिक भविष्यवादी तकनीकों के विकास में रीढ़ की हड्डी साबित हो सकता है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने एक महत्वपूर्ण नीतिगत परामर्श भी दिया कि यदि इस एआई आधारित अनुसंधान और विकास में सही समय पर सही दिशा में निवेश बढ़ाया जाए, तो भारत वैश्विक वैज्ञानिक प्रगति में अपना सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक योगदान देने की पूरी क्षमता रखता है। ‘इनोवेटिंग एट स्केल’ की मुख्य थीम के तहत आयोजित हुए इस भव्य समर दावोस सम्मेलन में दुनिया भर के 1,700 से अधिक नेताओं, नीति-निर्माताओं और शीर्ष उद्योग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया, जहाँ इस बात पर पूर्ण सहमति बनी कि भविष्य की तकनीकी महाशक्ति के रूप में भारत का उदय अब तय हो चुका है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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