डिजिटल युग में भारत के राजमार्ग अब केवल कोलतार और कंक्रीट की राहें नहीं रह गए हैं। ये आधुनिक अवसंरचना केवल शहरों और राज्यों को जोड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा और गतिशीलता की रीढ़ के रूप में उभर रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग अब बाधारहित परिवहन, समय पर सूचना प्रवाह और स्मार्ट निर्णय प्रणाली का आधार बन गए हैं, जिससे यात्रियों, वाहनों और माल ढुलाई दोनों को नए आयाम मिल रहे हैं।

मार्च 2025 तक, भारत का सड़क नेटवर्क 63 लाख किलोमीटर से अधिक तक पहुंच गया है, जो इसे विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क बनाता है। इसी अवधि में, राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2013-14 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर 1,46,204 किलोमीटर हो गई। इस दौरान 54,917 किलोमीटर नए राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ। यह केवल निर्माण की क्षमता ही नहीं, बल्कि डिजिटल निगरानी और प्रबंधन की आवश्यकता को भी दर्शाता है।

टोल संग्रह प्रणाली में डिजिटल क्रांति ने यात्रियों के अनुभव को बदल दिया है। फास्टैग और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (NETC) प्रणाली के माध्यम से देश के सभी टोल बूथों पर रुकावट रहित भुगतान संभव हुआ है। अब लगभग 98 प्रतिशत वाहन फास्टैग का उपयोग कर रहे हैं, और 8 करोड़ से अधिक लोग इसके उपयोगकर्ता हैं। फास्टैग वार्षिक पास का परिचय देकर यात्रियों को पूरे साल या 200 बार टोल केंद्रों को पार करने की सुविधा मिली है, जो ‘राजमार्गयात्रा’ ऐप या एनएचएआई की वेबसाइट पर केवल दो घंटे में सक्रिय किया जा सकता है।

सरकार ने टोल संग्रह में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए नियमों में संशोधन किया है। 15 नवंबर 2025 से, नकद भुगतान करने वाले गैर-फास्टैग उपयोगकर्ताओं से दोगुना शुल्क लिया जाएगा, जबकि यूपीआई विकल्प चुनने वालों को 1.25 गुना शुल्क देना होगा। इसी तरह, गुजरात के एनएच-48 पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लॉन्च किया गया, जो चलते वाहनों के फास्टैग और नंबर प्लेट पढ़कर रुकावट रहित टोल संग्रह सुनिश्चित करता है।

यात्रियों के लिए स्मार्ट एप्लिकेशन ‘राजमार्गयात्रा’ ने डिजिटल यात्रा को नए सिरे से परिभाषित किया है। यह ऐप टोल केंद्र, पेट्रोल पंप, अस्पताल, ईवी चार्जिंग स्टेशन और मौसम जैसी लाइव जानकारी प्रदान करता है। फास्टैग सेवाओं के साथ एकीकृत होने के कारण ऐप यात्रा को सरल, तेज़ और सुविधाजनक बनाता है। इसकी शिकायत प्रणाली उपयोगकर्ताओं को गड्ढे, रखरखाव या सुरक्षा संबंधित समस्याओं की तस्वीरें और वीडियो अपलोड करने की सुविधा देती है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।

आंतरिक कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए एनएचएआई ने ‘एनएचएआई वन’ ऐप लॉन्च किया है। यह प्लेटफ़ॉर्म परियोजना संचालन के प्रमुख क्षेत्रों जैसे फील्ड स्टाफ उपस्थिति, सड़क रखरखाव, सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण अनुरोध को एकीकृत करता है। जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्पिंग के माध्यम से यह परियोजना प्रबंधन को वास्तविक समय में ट्रैक और मॉनिटर करता है।

भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के माध्यम से भारत के राजमार्गों का डिजिटल मानचित्रण किया गया है। इस प्रणाली ने 550 से अधिक लाइव डेटा स्तरों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की योजना, निगरानी और क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया है।

स्मार्ट प्रौद्योगिकियों का उपयोग दुर्घटनाओं में कमी, यातायात नियंत्रण और पर्यावरणीय अनुकूलन के लिए भी किया जा रहा है। उन्नत परिवहन प्रबंधन प्रणाली (ATMS) दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर लागू की गई है। इसके साथ ही एनएचएआई ने हरित राजमार्ग मिशन और मिशन अमृत सरोवर के तहत पौधारोपण, जल निकाय पुनर्निर्माण और पुनरावर्तित सामग्री का व्यापक उपयोग किया है।

भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग पारंपरिक मार्गों से आगे बढ़कर डिजिटल, स्मार्ट और संवहनीय अवसंरचना के रूप में विकसित हो रहे हैं। फास्टैग, ‘राजमार्गयात्रा’, ‘एनएचएआई वन’, GIS आधारित योजना और उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से भारत का राजमार्ग नेटवर्क अब केवल गति और कनेक्टिविटी का प्रतीक नहीं, बल्कि तकनीकी बुद्धिमत्ता, पारदर्शिता और सुरक्षित यात्रा का भी वाहक बन गया है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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