फ्लिपकार्ट भारत में फूड डिलीवरी कारोबार में उतरने की तैयारी कर रही है। वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी अपनी नई सेवा ‘ईट-इन बाय मिनट्स’ (Eat-in by Minutes) का बेंगलुरु में आंतरिक परीक्षण कर रही है। इस ट्रायल में शुरुआत में कुछ सौ कर्मचारी शामिल थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 8,000 से अधिक हो गई है। कंपनी की योजना अक्टूबर के अंत तक सेवा को सार्वजनिक रूप से लॉन्च करने और इस साल के अंत तक पांच या छह शहरों में इसका विस्तार करने की है।

टेकक्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लिपकार्ट ने अपने लॉजिस्टिक्स कारोबार एकार्ट (Ekart) के माध्यम से फूड डिलीवरी के लिए अलग डिलीवरी बेड़ा भी तैयार किया है। यह बेड़ा कंपनी की क्विक कॉमर्स सेवाओं के ऑर्डर पहुंचाने वाले डिलीवरी कर्मचारियों से अलग है। बेंगलुरु की सड़कों पर ‘ईट-इन बाय मिनट्स’ की ब्रांडिंग वाली जर्सी पहने डिलीवरी राइडर्स ऑर्डर पहुंचाते भी दिखाई दिए हैं।

फ्लिपकार्ट के मुख्य शॉपिंग ऐप में इस सेवा के लिए अलग टैब दिया गया है। यह टैब कंपनी की क्विक कॉमर्स सेवा फ्लिपकार्ट मिनट्स और ट्रैवल बुकिंग विकल्पों के साथ दिखाई देता है। इसके जरिए ग्राहक उन रेस्टोरेंट से खाना मंगा सकेंगे, जो सरकारी समर्थित ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) पर सूचीबद्ध हैं। इसके अलावा, फ्लिपकार्ट ने कुछ रेस्टोरेंट के साथ सीधे साझेदारी भी की है।

फ्लिपकार्ट ऐसे समय में इस बाजार में प्रवेश करने की तैयारी कर रही है, जब भारत में फूड डिलीवरी कारोबार पर जोमैटो और स्विगी का दबदबा है। ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के अनुमान के अनुसार, भारत का फूड डिलीवरी बाजार सालाना 18 से 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। हालांकि, ऑनलाइन डिलीवरी का हिस्सा देश के कुल फूड सर्विस उद्योग में अभी भी 15 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। बर्नस्टीन के मुताबिक, Eternal के स्वामित्व वाली जोमैटो और स्विगी मिलकर हर साल अनुमानित 8.5 करोड़ से 9.5 करोड़ भुगतान करने वाले ग्राहकों को सेवा देती हैं। भारत में एक अरब से अधिक इंटरनेट सब्सक्रिप्शन हैं, जो ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग बाजार में विस्तार की संभावनाओं को दर्शाते हैं।

इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की कोशिश केवल फ्लिपकार्ट तक सीमित नहीं है। राइड-हेलिंग कंपनी रैपिडो अपनी फूड डिलीवरी सेवा ओनली (Ownly) का विस्तार कर रही है, जिसमें रेस्टोरेंट से कोई कमीशन नहीं लिया जाता। वहीं, स्विगी ने कम कीमत में भोजन तलाशने वाले ग्राहकों के लिए टॉइंग (Toing) नाम से अलग ऐप लॉन्च किया है। इन पहलों से फूड डिलीवरी उद्योग के मौजूदा मूल्य निर्धारण मॉडल और रेस्टोरेंट से वसूले जाने वाले कमीशन पर दबाव बढ़ रहा है।

नई दिल्ली स्थित नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सागर दारयानी ने कहा, “एकाधिकार बुरा है, लेकिन दो कंपनियों का दबदबा उससे भी ज्यादा खराब है।” यह संगठन देशभर में पांच लाख से अधिक रेस्टोरेंट का प्रतिनिधित्व करता है। दारयानी के मुताबिक, लंबे समय से रेस्टोरेंट संचालकों को इन दो प्रमुख प्लेटफॉर्म के विकल्प की जरूरत रही है।

भारत में फूड डिलीवरी कारोबार में इससे पहले भी बड़ी कंपनियां उतरने की कोशिश कर चुकी हैं। अमेजन ने 2020 में बेंगलुरु में फूड ऑर्डरिंग सेवा शुरू की थी, लेकिन दो साल बाद इसे बंद कर दिया। गूगल का एरियो (Areo) ऐप भी फूड ऑर्डरिंग सहित कई सेवाएं देने के बावजूद पर्याप्त लोकप्रियता हासिल नहीं कर सका। उबर ने भी 2020 में भारत में अपना उबर ईट्स कारोबार जोमैटो को बेच दिया था।

दारयानी के अनुसार, फ्लिपकार्ट की रणनीति पहले इस बाजार में उतरने वाली कंपनियों से अलग है। जोमैटो और स्विगी ने भोजन की डिलीवरी से कारोबार शुरू किया और बाद में क्विक कॉमर्स में विस्तार किया। इसके उलट, फ्लिपकार्ट अपने स्थापित ई-कॉमर्स कारोबार और बढ़ती क्विक कॉमर्स सेवाओं के आधार पर फूड डिलीवरी बाजार में प्रवेश कर रही है। दारयानी ने टेकक्रंच से कहा कि फ्लिपकार्ट को क्विक कॉमर्स से मिलने वाला लाभ फूड डिलीवरी में भी काम आएगा, जिससे इसका संचालन अधिक किफायती और कुशल हो सकता है।

रेस्टोरेंट संचालकों के लिए कमीशन की दर भी इस प्रतिस्पर्धा का अहम पहलू है। वॉव! मोमो फूड्स के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी दारयानी ने बताया कि फ्लिपकार्ट ने लगभग 10 प्रतिशत बेस कमीशन का प्रस्ताव दिया है। इसके मुकाबले रेस्टोरेंट आमतौर पर जोमैटो और स्विगी को 20 से 25 प्रतिशत कमीशन देते हैं।

हालांकि, रेस्टोरेंट का खर्च केवल कमीशन तक सीमित नहीं रहता। विज्ञापन, छूट और अन्य प्रचार गतिविधियों को जोड़ने पर स्थापित प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर की कुल कीमत का 40 से 50 प्रतिशत तक खर्च हो सकता है। दारयानी को उम्मीद है कि फ्लिपकार्ट इस कुल लागत को लगभग 15 से 16 प्रतिशत तक सीमित रख सकती है। ऐसा होने पर रेस्टोरेंट संचालकों के पास प्रत्येक ऑर्डर से अधिक कमाई बच सकती है।

ग्राहकों को आकर्षित करना हालांकि फ्लिपकार्ट के लिए अलग चुनौती होगी। बर्नस्टीन का अनुमान है कि अधिक कुशल संचालन के कारण नए प्लेटफॉर्म ग्राहकों को प्रति ऑर्डर केवल 20 से 30 रुपये की बचत करा सकते हैं। यह बचत ग्राहकों को जोमैटो और स्विगी से दूर लाने के लिए पर्याप्त होगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। दोनों स्थापित कंपनियां ग्राहकों को अपने साथ बनाए रखने के लिए अधिक छूट भी दे सकती हैं।

टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, दारयानी ने बताया कि फ्लिपकार्ट ने रेस्टोरेंट संचालकों को अक्टूबर के अंत तक सेवा का सार्वजनिक लॉन्च करने और 2026 के अंत तक पांच या छह शहरों में विस्तार करने की योजना के बारे में जानकारी दी है।

फूड डिलीवरी कारोबार में विस्तार की यह तैयारी ऐसे समय हो रही है, जब फ्लिपकार्ट की लंबे समय से प्रस्तावित शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कल्याण कृष्णमूर्ति ने हाल ही में आईपीओ की समयसीमा बताने से इनकार किया था। कंपनी अपने ऐप पर ग्राहकों की बार-बार वापसी बढ़ाने के लिए नए कारोबारों का विस्तार कर रही है।

भारत के ई-कॉमर्स बाजार में भी प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। शुरुआत में कुछ ही मिनटों में किराने का सामान पहुंचाने वाले क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब नए आईफोन और अन्य गैर-जरूरी खरीदारी से जुड़े उत्पाद भी बेच रहे हैं। इससे उनकी प्रतिस्पर्धा फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों से सीधे बढ़ रही है। टेकक्रंच के अनुसार, फ्लिपकार्ट ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।

Pratahkal Bureau

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