Apple समेत अब सभी कम्पनीज़ बदलेंगी फ़ोन का डिज़ाइन? जानें क्या हैं EU के नए गाइडलाइन्स
यूरोपीय संघ ने 2027 से स्मार्टफोन्स में यूज़र-रिप्लेसेबल बैटरी अनिवार्य करने का बड़ा फैसला लिया है। Apple समेत सभी कंपनियों को डिजाइन बदलना होगा, जिससे डिवाइस अधिक टिकाऊ और रिपेयर-फ्रेंडली बनेंगे।

स्मार्टफोन की बैटरी निकालने की प्रक्रिया
यूरोप में तकनीकी उद्योग को एक बड़ा झटका देने वाला फैसला सामने आया है, जिसने स्मार्टफोन कंपनियों की कार्यप्रणाली और डिजाइन दोनों को बदलने की दिशा में धकेल दिया है। European Union ने एक नई बैटरी रेगुलेशन नीति के तहत यह अनिवार्य कर दिया है कि आने वाले वर्षों में बाजार में बिकने वाले स्मार्टफोन्स और टैबलेट्स में बैटरी को उपयोगकर्ता स्वयं बदल सकेगा। इस फैसले का असर Apple, Samsung और अन्य सभी प्रमुख ब्रांड्स पर समान रूप से पड़ेगा।
इस नए नियम के अनुसार, वर्ष 2027 के आसपास से यूरोपीय बाजार में बिकने वाले सभी स्मार्टफोन्स और टैबलेट्स को इस तरह डिजाइन करना होगा कि उपयोगकर्ता सामान्य या आसानी से उपलब्ध उपकरणों की मदद से बैटरी को बदल सके। इसके साथ ही कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि डिवाइस की बैटरी कम से कम 5 से 7 वर्षों तक आसानी से हटाने योग्य बनी रहे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करना और डिवाइसेज़ की उम्र को बढ़ाना है, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार नया फोन खरीदने की आवश्यकता न पड़े।
इस नियम के लागू होने से सबसे ज्यादा प्रभाव iPhone निर्माता Apple पर देखने को मिलेगा। कंपनी को अपने भविष्य के iPhones के डिजाइन में बड़े बदलाव करने होंगे, जिससे बैटरी को आसानी से बदला जा सके। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि पुराने जमाने की तरह बैक कवर खोलकर बैटरी निकालने वाले फोन वापस आ जाएंगे। इसके बजाय कंपनियों को बैटरी तक पहुंच को सरल बनाना होगा, चिपकने वाले पदार्थों (glue) का उपयोग कम करना होगा और डिवाइस को अधिक ‘repair-friendly’ बनाना होगा।
दिलचस्प बात यह है कि Apple पहले से ही इस दिशा में कुछ कदम उठा चुका है। हाल के iPhone मॉडल्स में बैटरी को बदलना पहले की तुलना में थोड़ा आसान किया गया है, जिसे इस नए कानून की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि यह कानून केवल यूरोपीय संघ तक सीमित है, लेकिन इसका वैश्विक प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जैसा कि पहले USB-C चार्जिंग पोर्ट के मामले में देखा गया, Apple जैसे ब्रांड्स अक्सर एक समान वैश्विक डिजाइन अपनाते हैं। ऐसे में यह बदलाव दुनिया के अन्य बाजारों में भी देखने को मिल सकता है।
यह समझना भी जरूरी है कि इस कानून को लेकर एक बड़ी गलतफहमी फैल रही है। यह नियम ‘पॉप-आउट’ बैटरी को अनिवार्य नहीं करता, बल्कि केवल इतना सुनिश्चित करता है कि उपयोगकर्ता या तकनीशियन सामान्य उपकरणों की मदद से बैटरी बदल सकें। यानी पूरी तरह से पुराने नोकिया जैसे फोन की वापसी अभी तय नहीं है।
यूरोपीय संघ का यह कदम तकनीकी उद्योग में स्थायित्व और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आने वाले समय में यह न केवल कंपनियों के डिजाइन सोच को बदलेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को अधिक टिकाऊ और मरम्मत योग्य डिवाइस भी उपलब्ध कराएगा, जो डिजिटल युग में जिम्मेदार उपभोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
