AI तकनीक EpiPred से बचपन की मिर्गी के सटीक आनुवंशिक कारणों का चलेगा पता
नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने AI मॉडल EpiPred विकसित किया, जो STXBP1 जीन में बीमारी फैलाने वाले आनुवंशिक बदलावों की सटीक पहचान कर सही इलाज में मदद करेगा।

टेक्सास कैपिटल के बाहर विभिन्न मुद्दों पर बैनर लेकर प्रदर्शन करते लोग।
बचपन की गंभीर मिर्गी के आनुवंशिक कारणों की पहचान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने नई संभावना पेश की है। नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन के वैज्ञानिकों और सहयोगी संस्थानों ने EpiPred नाम का एक मशीन लर्निंग मॉडल विकसित किया है, जो यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि मिर्गी से जुड़े आनुवंशिक बदलाव वास्तव में बीमारी पैदा करने वाले हैं या नहीं। जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह तकनीक गलत निदान की पहचान करने और भविष्य में मरीजों को लक्षित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने STXBP1 जीन पर ध्यान केंद्रित किया, जो विकासात्मक और मिर्गी संबंधी एन्सेफैलोपैथी से जुड़े सबसे आम जीनों में से एक है। यह दुर्लभ न्यूरोविकास संबंधी विकारों का समूह है, जिसमें जीवन के शुरुआती दौर में दौरे पड़ते हैं और विकास में गंभीर देरी हो सकती है।
आनुवंशिक जांच के जरिए STXBP1 जीन में बदलावों की पहचान की जा सकती है, लेकिन इनमें से कई को ‘वेरिएंट्स ऑफ अनसर्टेन सिग्निफिकेंस’ (VUS) यानी अनिश्चित महत्व वाले आनुवंशिक बदलावों की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक यह तय नहीं कर पाते कि संबंधित बदलाव मरीज की बीमारी का कारण है या केवल प्राकृतिक आनुवंशिक भिन्नता।
अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के केन एंड रूथ डेवी डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरोलॉजी के डिवीजन ऑफ एपिलेप्सी एंड क्लिनिकल न्यूरोफिजियोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जेम्मा कारविल ने कहा, “वेरिएंट ऑफ अनसर्टेन सिग्निफिकेंस का मतलब है कि हमारे पास यह बताने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है कि बदलाव बीमारी पैदा करने वाला है या हानिरहित।”
उन्होंने बताया कि दुर्लभ प्रकार की मिर्गी से प्रभावित परिवारों के लिए यह अनिश्चितता गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। कारविल के अनुसार, “यदि आप क्लिनिकल आनुवंशिक जांच कराते हैं और इस जीन में अनिश्चित महत्व वाला बदलाव मिलता है, तो यह मूल रूप से आपको भविष्य में किसी भी जीन-लक्षित उपचार से वंचित कर सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “क्योंकि निदान निश्चित नहीं होता, इसका मतलब है कि आप उन नई सटीक उपचार पद्धतियों के लिए नामांकन के पात्र नहीं होते, जो विशेष रूप से संबंधित जीन को लक्षित करती हैं।”
इस चुनौती से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने EpiPred विकसित किया। यह जीन-विशिष्ट मशीन लर्निंग मॉडल है, जिसे यह अनुमान लगाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है कि STXBP1 जीन में मिससेंस वेरिएंट बीमारी पैदा करने की कितनी संभावना रखते हैं। मिससेंस वेरिएंट ऐसा आनुवंशिक बदलाव होता है, जो प्रोटीन में एक अमीनो एसिड को दूसरे से बदल सकता है।
टीम ने मॉडल के अनुमानों की जांच के लिए प्रयोगशाला में कई परीक्षण किए। इनमें प्रोटीन की मात्रा, स्थिरता, घुलनशीलता और कोशिका के अन्य घटकों के साथ उसकी अंतःक्रिया को मापा गया।
यह शोध अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) से वित्तपोषित सहयोगी परियोजना के तहत किया गया। इसमें नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, वेल कॉर्नेल मेडिसिन और सेंट जूड चिल्ड्रन्स रिसर्च हॉस्पिटल शामिल थे। इस पहल में कंप्यूटेशनल तरीकों के साथ कोशिकीय और पशु मॉडल प्रणालियों का उपयोग किया गया, ताकि मिर्गी से जुड़े आनुवंशिक बदलावों की बेहतर व्याख्या की जा सके।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, EpiPred ने सटीकता, संवेदनशीलता और विशिष्टता के मामले में मौजूदा व्यापक आनुवंशिक वेरिएंट पूर्वानुमान उपकरणों से बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अनुमान प्रयोगशाला में प्राप्त निष्कर्षों से भी काफी हद तक मेल खाते थे। मॉडल की मदद से वैज्ञानिकों ने ऐसे कई आनुवंशिक बदलावों की पहचान की, जिन्हें पिछले अध्ययनों में गलत श्रेणी में रखा गया हो सकता है।
कारविल ने कहा, “हमें गलत निदान के कुछ मामले मिले। दूसरे शब्दों में, कुछ ऐसे लोगों का निदान STXBP1-संबंधी विकार के रूप में किया गया था, लेकिन हमें वास्तव में लगता है कि यह गलत निदान है।” कारविल फार्माकोलॉजी और पीडियाट्रिक्स की एसोसिएट प्रोफेसर भी हैं।
उन्होंने कहा कि जीन-लक्षित उपचारों के क्लिनिकल ट्रायल में आगे बढ़ने के साथ निदान की गलतियों को सुधारना और भी महत्वपूर्ण हो सकता है। उनके शब्दों में, “जैसे-जैसे हम इन सटीक उपचारों की ओर बढ़ रहे हैं, इन निदानों में सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है।”
इसके बाद शोध दल ने सैकड़ों ज्ञात आनुवंशिक वेरिएंट का अध्ययन किया और STXBP1 जीन में संभावित हर मिससेंस वेरिएंट के प्रभाव का अनुमान लगाया। अध्ययन में पाया गया कि वर्तमान में अनिश्चित श्रेणी में रखे गए लगभग एक-चौथाई वेरिएंट वास्तव में बीमारी पैदा करने वाले हो सकते हैं। कारविल के अनुसार, इससे अधिक मरीजों को निश्चित निदान मिल सकता है और वे भविष्य में उपलब्ध होने वाले उपचारों के लिए पात्र बन सकते हैं।
अध्ययन के सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में हानिकारक आनुवंशिक बदलावों की सटीक पहचान करने की मॉडल की क्षमता शामिल रही। कारविल ने कहा, “हम बहुत अधिक सटीकता के साथ अनुमान लगा सकते हैं कि कोई मिससेंस वेरिएंट रोग पैदा करने वाला होने की संभावना रखता है या नहीं।”
शोधकर्ताओं ने EpiPred को एक इंटरैक्टिव वेब एप्लिकेशन के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध भी कराया है। इसके जरिए चिकित्सक, वैज्ञानिक और परिवार STXBP1 जीन के विभिन्न वेरिएंट के बारे में मॉडल के अनुमान देख सकते हैं।
अब कारविल और उनकी टीम ऐसे अधिक क्षमता वाले परीक्षण उपकरण विकसित कर रही है, जिनसे एक साथ हजारों आनुवंशिक वेरिएंट का मूल्यांकन किया जा सके। कारविल ने कहा, “हम अब हर एक मिससेंस वेरिएंट की जांच करने में सक्षम होने के लिए अधिक उच्च-क्षमता वाले उपकरण विकसित कर रहे हैं।”
मूल अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चार अलग-अलग प्रयोगात्मक परीक्षणों की मदद से लगभग दो दर्जन वेरिएंट का मूल्यांकन किया था। भविष्य के प्रयासों में इस दायरे को काफी बढ़ाने की योजना है। कारविल ने बताया, “अब हमने दो ऐसे परीक्षण विकसित किए हैं, जिनसे STXBP1 में बनने वाले हर संभावित वेरिएंट को देखा जा सकता है।” उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, हम इस एक जीन में 3,000 से अधिक वेरिएंट बना सकते हैं और यह निर्धारित कर सकते हैं कि उनका प्रोटीन के कार्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।”
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस तरीके का उपयोग मिर्गी से आगे बढ़कर अन्य दुर्लभ आनुवंशिक विकारों में भी किया जा सकेगा। जीन-विशिष्ट AI मॉडल और प्रयोगशाला में सत्यापन को एक साथ जोड़ने वाला यह दृष्टिकोण निदान में सुधार, क्लिनिकल ट्रायल में मरीजों के चयन और सटीक चिकित्सा को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
कारविल ने इस परियोजना की सफलता का श्रेय विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता वाले शोध दलों के करीबी सहयोग को दिया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह विभिन्न वैज्ञानिक टीमों के सर्वोत्तम सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण था।”
इस अध्ययन को नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ की एपिलेप्सी मल्टीप्लेटफॉर्म वेरिएंट प्रेडिक्शन (EpiMVP) परियोजना के तहत अनुदान संख्या U54NS117170 से समर्थन मिला।

Pratahkal Bureau
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