DPDP Rules 2025 : भारत ने 14 नवंबर 2025 को डिजिटल युग की सबसे बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी छलांग लगाते हुए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) नियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया। इस अधिसूचना के साथ ही डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का पूर्ण रूप से कार्यान्वयन शुरू हो गया है, जिससे देश में डिजिटल डेटा सुरक्षा का एक व्यापक, स्पष्ट और नागरिक-केंद्रित ढांचा स्थापित हो गया है। तेजी से बढ़ते डिजिटल भारत में यह व्यवस्था न केवल व्यक्तिगत अधिकारों को मज़बूत करती है, बल्कि संगठनों पर जिम्मेदार डेटा उपयोग की सख्त और पारदर्शी बाध्यता भी सुनिश्चित करती है।

नए नियमों के लागू होने से पहले इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने देशभर में जनता से व्यापक परामर्श किया। दिल्ली से लेकर चेन्नई तक सात प्रमुख शहरों में आयोजित परामर्श बैठकों में स्टार्टअप्स, MSMEs, उद्योग संगठनों, नागरिक समूहों, तकनीकी विशेषज्ञों और सरकारी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस प्रक्रिया में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुल 6,915 सुझाव प्राप्त हुए, जिन्होंने अंतिम नियमों की संरचना को गहरा प्रभाव दिया और इस व्यापक नीति को अधिक व्यवहारिक, समावेशी और ज़मीनी बनाया।

भारत के डीपीडीपी ढांचे की विशेषता इसकी सरलता और स्पष्टता है। यह कानून ‘SARAL’ दृष्टिकोण पर आधारित है—एक ऐसा सिस्टम जो आसान भाषा, व्यावहारिक प्रक्रियाओं और स्पष्ट ज़िम्मेदारियों से संचालित होता है। अधिनियम की नींव सात महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर रखी गई है, जिनमें सहमति, पारदर्शिता, उद्देश्य सीमा, डेटा न्यूनिकरण, सटीकता, भंडारण नियंत्रण, सुरक्षा उपाय और जवाबदेही शामिल हैं। ये सिद्धांत सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी व्यक्ति का डिजिटल डेटा केवल स्पष्ट, वैध और आवश्यक उद्देश्यों के लिए ही उपयोग हो।

अधिनियम के साथ ही भारत डेटा संरक्षण बोर्ड की भी स्थापना की गई है एक स्वतंत्र डिजिटल-फर्स्ट संस्थान, जो अनुपालन की निगरानी करेगा, उल्लंघनों की जांच करेगा और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को सरल बनाएगा। नागरिकों के लिए एक विशेष पोर्टल और मोबाइल एप भी सक्षम किया जा रहा है, जिससे शिकायत दर्ज करना और उसकी स्थिति देखना सरल और त्वरित होगा। बोर्ड के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें टीडीएसएटी में सुनी जाएँगी।

डीपीडीपी नियम 2025 डेटा सुरक्षा को चरणबद्ध और व्यावहारिक ढंग से लागू करने का ढांचा प्रदान करते हैं। संगठनों को 18 महीने का समय दिया गया है, ताकि वे नए मानकों को व्यवस्थित रूप से अपना सकें। सहमति नोटिस अब स्पष्ट और सरल भाषा में देने होंगे और सहमति प्रबंधकों को भारत में स्थित कंपनियाँ होना अनिवार्य है। डेटा उल्लंघन की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत और स्पष्ट रूप से सूचित करना होगा, ताकि वे संभावित नुकसान से बचने के लिए समय पर कदम उठा सकें।

इन नियमों के तहत नागरिकों को पहली बार अपने व्यक्तिगत डेटा पर इतने व्यापक अधिकार मिले हैं। वे जान सकते हैं कि कौन-सा डेटा, क्यों और कैसे उपयोग हो रहा है। वे अपने डेटा की प्रति मांग सकते हैं, उसमें सुधार करवा सकते हैं, उसे अपडेट करवा सकते हैं या आवश्यक स्थिति में हटवाने का अनुरोध कर सकते हैं। किसी भी अनुरोध पर डेटा फ़िड्युसरीज़ को 90 दिनों के भीतर जवाब देना अनिवार्य होगा। बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे यह ढांचा और अधिक मानवीय और सार्वभौमिक बनता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के साथ पूरी तरह संगत है। आरटीआई की धारा 8(1)(जे) में किया गया संशोधन निजता और पारदर्शिता दोनों को संतुलित करता है। सार्वजनिक हित के मामलों में सूचना साझा करने का प्रावधान अभी भी यथावत रहेगा और धारा 8(2) का जनहित सिद्धांत पूरी तरह लागू रहेगा। इस प्रकार, डेटा गोपनीयता और लोकतांत्रिक पारदर्शिता के बीच एक स्वस्थ संतुलन स्थापित होता है।

नियमों में भारी जुर्मानों का भी स्पष्ट प्रावधान है। सुरक्षा उपायों में चूक पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि बच्चों से संबंधित नियमों के उल्लंघन या डेटा उल्लंघन की रिपोर्टिंग में लापरवाही पर 200 करोड़ रुपये तक की सज़ा निर्धारित है। अन्य उल्लंघनों के लिए 50 करोड़ रुपये तक का दंड लागू होगा।

अंततः, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम और डीपीडीपी नियमों का यह संयोजन भारत को डिजिटल शासन के उस स्तर पर ले जाता है, जहाँ नागरिकों के डेटा अधिकार सुरक्षित हैं, उद्योग के लिए नियम स्पष्ट हैं और नवाचार के लिए वातावरण पारदर्शी और भरोसेमंद है। यह कदम न केवल भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि इस विकास यात्रा के केंद्र में नागरिकों की गोपनीयता और सुरक्षा कायम रहे।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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