Data Privacy Day : डिजिटल युग में नागरिकों की निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को केंद्र में रखते हुए डेटा गोपनीयता दिवस प्रतिवर्ष 28 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह दिवस ऐसे समय पर आया है, जब भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और डिजिटल शासन नागरिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है।

डेटा गोपनीयता दिवस की शुरुआत 2006 में यूरोप परिषद द्वारा की गई थी। यह दिवस कन्वेंशन 108 पर हस्ताक्षर की स्मृति में मनाया जाता है, जो डेटा संरक्षण से जुड़ी दुनिया की पहली कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसका उद्देश्य डिजिटल परिवेश में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, जिम्मेदार डेटा उपयोग और नागरिकों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

भारत में डिजिटल सेवाओं का दायरा तेजी से विस्तारित हुआ है। आधार आधारित पहचान प्रणाली, यूपीआई डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म, मायगव और ई-संजीवनी जैसे नागरिक-केंद्रित मंचों ने सेवा वितरण, स्वास्थ्य, वित्त और शासन की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। सितंबर 2025 तक देश में 101.7 करोड़ से अधिक ब्रॉडबैंड उपभोक्ता दर्ज किए गए, जिससे भारत विश्व की सबसे अधिक कनेक्टेड डिजिटल आबादी में शामिल हो गया है। इस व्यापक डिजिटल विस्तार ने जहां सुविधा और समावेशन बढ़ाया है, वहीं डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है।

डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा दुरुपयोग, साइबर हमले और गोपनीयता उल्लंघन जैसे जोखिम भी सामने आए हैं। इन्हीं चुनौतियों के मद्देनज़र सरकार ने ₹782 करोड़ (2025-26) के बजट आवंटन के साथ साइबर सुरक्षा ढांचे को और सुदृढ़ किया है।

कानूनी और नियामक स्तर पर भारत ने मजबूत ढांचा तैयार किया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 डिजिटल लेनदेन, ई-गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा के लिए आधार प्रदान करता है, जबकि आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करते हैं।

डेटा संरक्षण की दिशा में सबसे बड़ा कदम डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 और इसके अंतर्गत अधिसूचित DPDP नियम, 2025 हैं। यह कानून नागरिकों को “डेटा प्रिंसिपल” के रूप में सशक्त बनाता है, उन्हें उनके व्यक्तिगत डेटा पर नियंत्रण देता है और डेटा प्रोसेस करने वाले संगठनों की जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

इसके साथ-साथ, CERT-In, I4C, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), हेल्पलाइन 1930, और 2024 में शुरू किया गया साइबर फ्रॉड मॉनिटरिंग सेंटर जैसे संस्थागत तंत्र साइबर खतरों से निपटने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साइबर फोरेंसिक प्रयोगशालाएं, साइबर कमांडो कार्यक्रम और व्यापक जन-जागरूकता अभियानों ने देश की साइबर सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती दी है।

डेटा गोपनीयता दिवस 2026 यह स्पष्ट संदेश देता है कि डिजिटल नवाचार तभी टिकाऊ और विश्वसनीय हो सकता है, जब वह नागरिकों की निजता, पारदर्शिता और जवाबदेही के मजबूत आधार पर खड़ा हो। तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य में, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक शासन की अनिवार्यता बन चुकी है। भारत का विकसित होता कानूनी ढांचा और संस्थागत तैयारी यह सुनिश्चित करती है कि डिजिटल भारत सुरक्षित, नैतिक और नागरिक-केंद्रित दिशा में आगे बढ़ता रहे।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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