GeM प्लेटफॉर्म पर AI क्रांति; क्या अब हर भाषा में व्यवहार करना होगा आसान ?
सरकारी ई-मार्केटप्लेस ने देश के एमएसएमई और स्थानीय विक्रेताओं को जोड़ने के लिए डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के साथ रणनीतिक सहयोग किया है।

देश की सरकारी खरीद प्रणाली और व्यापारिक अवसरों को लोकतांत्रिक बनाने के लिए GeM और भाषिणी के बीच हुए तकनीकी एकीकरण के संदर्भ में डिजिटल इंडिया का एक प्रतीकात्मक ग्राफिक।
GeM portal AI language technology integration : डिजिटल इंडिया के इतिहास में सरकारी खरीद की पूरी प्रक्रिया को बदलने और देश के अंतिम छोर पर बैठे छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए एक अभूतपूर्व तकनीकी महा-गठबंधन की शुरुआत हो चुकी है। देश की सार्वजनिक खरीद प्रणाली में बहुभाषी डिजिटल पहुंच को मजबूत करने के लिए डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह क्रांतिकारी पहल ‘भाषिणी फॉर सेवा/संचालन – ए भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम’ के तहत शुरू की गई है, जो आने वाले समय में देश के भीतर व्यापार करने के तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदल देगी। इस सहयोग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब देश का कोई भी छोटा व्यापारी, एमएसएमई या स्टार्टअप भाषा की अड़चन के कारण सरकारी टेंडरों और व्यापारिक अवसरों से वंचित नहीं रहेगा।
इस तकनीकी एकीकरण के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन की प्रमुख इकाई 'डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन' और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल GeM एक साथ मिलकर काम करेंगे। इस रणनीतिक सहयोग का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय खरीद पोर्टल पर बहुभाषी पहुंच, बहुभाषी प्रशासन और बहुभाषी सेवा वितरण को पूरी तरह से मजबूत करना है, ताकि कोई भी उपयोगकर्ता अपनी पसंदीदा और क्षेत्रीय भाषा में जानकारी तथा सेवाओं का सीधा लाभ उठा सके। देश की भौगोलिक और भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए इस पहल के अंतर्गत भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं समेत अन्य प्रांतीय बोलियों में निर्बाध संवाद सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक वॉयस-फर्स्ट तकनीक और जनरेटिव एआई (Generative AI) आधारित समाधान विकसित किए जाएंगे।
प्रशासनिक और तकनीकी रूपरेखा के अनुसार, GeM और भाषिणी की विशेषज्ञ टीमें संयुक्त रूप से काम करते हुए भाषिणी उद्यात, मित्र, ऐपमित्र, सहयोगी और प्रवक्ता जैसी अनूठी पहलों के जरिए बहुभाषी डिजिटल संसाधनों का तेजी से विकास, एकीकरण और तैनाती करेंगी। इस परियोजना के तकनीकी आयामों में ट्रांसलेशन एपीआई इंटीग्रेशन, विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों के अनुरूप भाषा मॉडल, बहुभाषी शब्दावली निर्माण, वॉयस-आधारित एडवांस तकनीक, रेफरेंस एप्लिकेशन, वॉयस बॉट और विशाल भाषाई डेटा सेट तैयार करने जैसे बेहद जटिल कार्य शामिल हैं। यह ढांचा न केवल सरकारी खरीद प्रणाली को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाएगा, बल्कि इसके जरिए भाषा संबंधी पुरानी बाधाएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी, जिससे विक्रेताओं का पंजीकरण, प्लेटफॉर्म नेविगेशन और आपसी संचार बेहद सुगम हो जाएगा।
इस समझौते के आधिकारिक और रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए GeM के एसीईओ एवं मुख्य विक्रेता अधिकारी अजित बी. चव्हाण ने कहा कि यह सहयोग भाषिणी की एआई आधारित अत्याधुनिक भाषा तकनीकों का उपयोग कर सार्वजनिक खरीद में सदियों पुरानी भाषाई बाधाओं को हमेशा के लिए दूर कर देगा और जेम पोर्टल को देश भर के सुदूर इलाकों में बैठे खरीदारों तथा विक्रेताओं के लिए शत-प्रतिशत सुलभ बनाएगा। वहीं, डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमिताभ नाग ने इस कदम को लोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि भाषिणी का अंतिम उद्देश्य देश के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को वास्तव में समावेशी बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि GeM के साथ यह अनूठा गठजोड़ देश के स्थानीय व्यवसायों, एमएसएमई, ग्रामीण उद्यमियों और स्वदेशी उद्योगों को सीधे राष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक अवसरों से जोड़ेगा, जो डिजिटल रूप से समावेशी अर्थव्यवस्था के भारत के विजन को एक नई वैधानिक मजबूती प्रदान करेगा।
यह तकनीकी बदलाव कितना व्यापक होने जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में भाषिणी प्लेटफॉर्म देश की 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को अपना सफल तकनीकी समर्थन दे रहा है। यह प्लेटफॉर्म प्रतिदिन 1.5 करोड़ से अधिक एआई आधारित अनुरोधों को सफलतापूर्वक संसाधित करता है, जिसमें 36 भारतीय पाठ्य भाषाएं, 23 भारतीय वॉयस भाषाएं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाएं पहले से ही शामिल हैं। इस महा-अभियान के तहत 'भाषादान' कार्यक्रम के माध्यम से भाषाई डेटा संग्रह, राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान और क्षमता निर्माण को भी बढ़ावा दिया जाएगा। अंततः, एआई और सरकारी ई-मार्केटप्लेस का यह मिलन भारत के आत्मनिर्भर व्यापारिक इकोसिस्टम को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देने और घरेलू व्यापार में समावेशिता का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखने के लिए तैयार है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
