मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र के पालघर जिले के आम्बेसरी गांव में तीसरी पर्वतीय सुरंग का सफल ब्रेकथ्रू पूरा हुआ। 1 जून 2026 को हुई इस उपलब्धि की घोषणा 2 जून को की गई। यह सुरंग हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है, जो भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को नई गति प्रदान करती है।

मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, जिसे देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है, ने महाराष्ट्र में एक और महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि हासिल की है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का सफल ब्रेकथ्रू पूरा कर दिया है, जो इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति में एक और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

यह ब्रेकथ्रू महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहानू तालुका स्थित आम्बेसरी गांव में 1 जून 2026 को पूरा किया गया। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की आधिकारिक घोषणा 2 जून 2026 को की गई, जिससे निर्माण कार्यों में तेजी और तकनीकी प्रगति का संकेत मिलता है। परियोजना में “टनल ब्रेकथ्रू” उस महत्वपूर्ण क्षण को कहा जाता है जब किसी सुरंग के दोनों छोर, जिन्हें अलग-अलग दिशाओं से खोदा जा रहा होता है, बीच में आकर आपस में मिल जाते हैं। यह प्रक्रिया न केवल निर्माण कार्य की सफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि भूमिगत मार्ग अब एक सतत और पूर्ण संरचना के रूप में तैयार हो चुका है। सुरंग निर्माण के क्षेत्र में इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग माइलस्टोन माना जाता है।

यह सुरंग मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है, जो भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है। यह पूरा मार्ग लगभग 508 किलोमीटर लंबा है, जो मुंबई (BKC) से शुरू होकर ठाणे, पालघर होते हुए गुजरात के विभिन्न हिस्सों से गुजरता हुआ अहमदाबाद तक पहुंचता है। इस कॉरिडोर का उद्देश्य देश में तेज, आधुनिक और अत्याधुनिक रेल परिवहन प्रणाली की स्थापना करना है।

महाराष्ट्र के इस हिस्से में सुरंग का निर्माण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में किया जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र पश्चिमी घाट की पहाड़ियों और कठिन भू-गर्भीय संरचना से प्रभावित है। इस परियोजना में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें NATM (New Austrian Tunnelling Method) जैसी उन्नत सुरंग निर्माण पद्धतियाँ शामिल हैं। यह सुरंग उच्च गति रेल संचालन के दौरान उत्पन्न होने वाले दबाव और भू-वैज्ञानिक चुनौतियों को सहन करने के लिए डिजाइन की गई है।

यह सुरंग महाराष्ट्र में प्रस्तावित सात पर्वतीय सुरंगों के नेटवर्क का हिस्सा है, जो पूरे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की भूमिगत संरचना को मजबूती प्रदान करती हैं। इस तीसरे ब्रेकथ्रू के साथ ही महाराष्ट्र में सुरंग निर्माण कार्य में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले लगभग पाँच महीनों के भीतर महाराष्ट्र में यह तीसरी पर्वतीय सुरंग ब्रेकथ्रू है। इससे पहले MT-5 सुरंग का पहला ब्रेकथ्रू जनवरी 2026 में और MT-6 सुरंग का दूसरा ब्रेकथ्रू फरवरी 2026 में पूरा किया गया था। लगातार हो रहे इन सफलताओं से परियोजना के भूमिगत निर्माण कार्य में तेजी और दक्षता दोनों का संकेत मिलता है।

मुंबई सेक्शन में यह परियोजना देश की सबसे जटिल भूमिगत रेल संरचनाओं में से एक मानी जा रही है। इसमें कुल 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण शामिल है, जो BKC से शिलफाटा तक फैली हुई है। इस संरचना में 16 किलोमीटर का हिस्सा टनल बोरिंग मशीन (TBM) द्वारा और 5 किलोमीटर का हिस्सा NATM तकनीक से निर्मित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, ठाणे क्रीक के नीचे लगभग 7 किलोमीटर लंबी समुद्री सुरंग भी इस परियोजना का हिस्सा है, जो इसे और अधिक तकनीकी रूप से जटिल बनाती है। यह पूरी प्रणाली दो उच्च गति ट्रैकों के लिए डिजाइन की गई है, जिससे रेल संचालन को अत्यधिक गति और सुरक्षा मिल सके।

मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को भारत में रेल परिवहन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। जापान की शिंकानसेन तकनीक के सहयोग से विकसित यह परियोजना न केवल यात्रा समय को कम करेगी, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और औद्योगिक विस्तार को भी नई दिशा प्रदान करेगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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