इंसानी मस्तिष्क की प्रयोगशाला में विकसित कोशिकाओं की मदद से रोबोटिक कुत्ते को नियंत्रित करने का प्रयोग जैविक कंप्यूटिंग के क्षेत्र में नई संभावनाएं सामने ला रहा है। इस तकनीक में जीवित तंत्रिका ऊतकों को पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर के साथ जोड़कर रोबोट के नियंत्रण में इस्तेमाल किया गया है। वैज्ञानिकों का उद्देश्य यह समझना है कि मस्तिष्क की कोशिकाएं कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स से जुड़े कार्यों में किस तरह योगदान दे सकती हैं।

बायोहाइब्रिड कंप्यूटिंग के तहत जैविक तंत्रिका ऊतकों और कृत्रिम तकनीकी प्रणालियों को एक साथ काम करने के लिए जोड़ा जाता है। पारंपरिक सिलिकॉन चिप पर आधारित कंप्यूटरों से अलग, इस पद्धति में वास्तविक न्यूरॉन्स का इस्तेमाल गणना और नियंत्रण से जुड़े कार्यों के लिए किया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जैविक तंत्रिका नेटवर्क की अनुकूलन क्षमता और कम ऊर्जा में काम करने की संभावनाएं भविष्य में ऐसी प्रणालियों के विकास में उपयोगी हो सकती हैं।

रोबोटिक कुत्ते को नियंत्रित करने से जुड़ा यह शोध उस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग है, जिसमें जीवित कोशिकाओं की गतिविधि को मशीनों के संचालन से जोड़ा जा रहा है। पारंपरिक रोबोट चलने, दौड़ने और शारीरिक गतिविधियां करने में सक्षम हो रहे हैं, लेकिन बदलती परिस्थितियों के अनुसार तेजी से सीखना और उचित कार्रवाई का चयन करना अब भी एक चुनौती है।

कॉर्टिकल लैब्स के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रेट कागन के अनुसार, रोबोटों की शारीरिक नियंत्रण क्षमता उल्लेखनीय रूप से विकसित हुई है, लेकिन परिस्थितियों में बदलाव होने पर तेजी से सीखने और अनुकूलन के लिए आवश्यक उच्चस्तरीय नियंत्रण अब भी चुनौती बना हुआ है। उनके मुताबिक, रोबोट का चलना, दौड़ना और कलाबाजियां करना प्रभावशाली है, लेकिन कब और कहां कोई कार्रवाई करनी है, इसका निर्धारण पारंपरिक तरीकों से करना कठिन बना रहता है।

जीवित तंत्रिका कोशिकाओं से रोबोट को नियंत्रित करने का विचार पूरी तरह नया नहीं है। हालांकि, इस क्षेत्र में प्रत्येक प्रयोग जैविक तंत्रिका ऊतकों और प्रोग्राम किए जा सकने वाले सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों तथा रोबोटिक उपकरणों के बीच बेहतर तालमेल की संभावनाओं को समझने में मदद करता है।

इस तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल के सामने अभी कई चुनौतियां हैं। प्रयोगशाला में विकसित मस्तिष्क की कोशिकाओं को जीवित रखने के लिए नियंत्रित वातावरण, पोषक तत्वों की निरंतर आपूर्ति और सहायक उपकरणों की जरूरत होती है। इसलिए केवल जैविक कोशिकाओं की ऊर्जा दक्षता के आधार पर पूरी प्रणाली की ऊर्जा खपत का आकलन नहीं किया जा सकता।

फिलहाल ऐसे प्रयोगों को औद्योगिक स्तर पर इस्तेमाल के लिए तैयार तकनीक के बजाय अनुसंधान के शुरुआती चरण के रूप में देखा जा रहा है। भविष्य में इनका उपयोग किस सीमा तक संभव होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वैज्ञानिक जीवित तंत्रिका नेटवर्क को कितनी विश्वसनीयता से नियंत्रित कर सकते हैं और क्या वे पारंपरिक कंप्यूटिंग प्रणालियों की तुलना में कोई स्पष्ट लाभ प्रदान करते हैं।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story