Starlink satellite internet launch in India 2026 update : दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलोन मस्क के नेतृत्व वाली कंपनी 'स्टारलिंक' ने वैश्विक इंटरनेट बाजार में अपनी बादशाहत कायम करने की दिशा में एक बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है। अमेरिकी नियामक 'यूएस फेडरल कम्यूनिकेशन कमीशन' (FCC) ने स्टारलिंक को अपनी 'सेकंड जनरेशन' (Gen2) के 7,500 अतिरिक्त सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में तैनात करने की ऐतिहासिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद मस्क के सैटेलाइट नेटवर्क की कुल संख्या अब बढ़कर 15,000 हो जाएगी, जो न केवल अमेरिका बल्कि भारत जैसे विशाल बाजार में सुपरफास्ट ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देने की क्षमता को दोगुना कर देगी।

तकनीकी बाधाएं दूर: अब 'गेम चेंजर' साबित होगी स्टारलिंक :

  • एफसीसी (FCC) का यह निर्णय केवल सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तकनीकी आयाम दूरसंचार जगत की पुरानी तस्वीर बदल देंगे।

  • फ्रीक्वेंसी पर से पाबंदी हटी: नियामक ने कंपनी को अब उन 5 विशिष्ट फ्रीक्वेंसी और वेव्स पर ऑपरेट करने की अनुमति दे दी है, जिन पर पहले सुरक्षा या तकनीकी कारणों से पाबंदी लगी हुई थी।

  • नेक्स्ट जनरेशन सर्विस: एफसीसी प्रमुख ब्रेंडन कार के अनुसार, यह मंजूरी ब्रॉडबैंड क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करेगी, जिससे सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी वह गति मिलेगी जो वर्तमान में केवल फाइबर-ऑप्टिक केबल से संभव है।

लाइसेंस की शर्तें और समयसीमा :

एफसीसी ने इस मंजूरी के साथ कुछ कड़े नियम भी लागू किए हैं ताकि अंतरिक्ष के मलबे और अन्य कंपनियों के हितों का टकराव न हो।

  • ऑपरेशनल डेडलाइन: स्टारलिंक को अपनी सेकंड जनरेशन के आधे सैटेलाइट्स दिसंबर 2028 तक हर हाल में ऑपरेशनल बनाने होंगे।

  • अंतिम लक्ष्य: शेष सैटेलाइट्स को चालू करने के लिए कंपनी के पास दिसंबर 2031 तक का समय है। मस्क का अंतिम लक्ष्य अंतरिक्ष में 30,000 सैटेलाइट्स का जाल बिछाना है, जिसमें से आधे का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है।

भारत में लॉन्चिंग की उलटी गिनती शुरू :

  • स्टारलिंक के इस वैश्विक विस्तार का सबसे सीधा और सकारात्मक असर भारत पर पड़ने वाला है। भारतीय दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ कंपनी की बातचीत अब अंतिम चरण में है।

  • प्रोविजनल लाइसेंस और ट्रायल: भारत में स्टारलिंक को पहले ही प्रोविजनल लाइसेंस मिल चुका है और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में इसके सफल ट्रायल किए जा रहे हैं।

  • कनेक्टिविटी को बूस्ट: नए सैटेलाइट्स के सक्रिय होने से भारत के हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर के राज्यों और दूर-दराज के गांवों में बिना किसी तार (वायर) के हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध हो सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टारलिंक की वरिष्ठ टीम और भारत सरकार के बीच चल रही निरंतर चर्चाएं अगले कुछ महीनों में एक बड़े औपचारिक लॉन्च में बदल सकती हैं। यह कदम न केवल डिजिटल इंडिया अभियान को नई गति देगा, बल्कि रिलायंस जियो और एयरटेल जैसे स्थापित खिलाड़ियों के लिए भी कड़ी प्रतिस्पर्धा की चुनौती पेश करेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि मस्क की यह 'आसमानी तकनीक' भारतीय उपभोक्ताओं की डिजिटल आदतों को किस तरह बदलती है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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