भाभा सेंटर का मेगा कदम; नए R&D कैंपस से टेक्नोलॉजी को मिलेगी नई उड़ान
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र आंध्र प्रदेश में 3,000 एकड़ में नया R&D कैंपस बनाएगा, जिसमें स्वदेशी न्यूक्लियर इनोवेशन, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी पर जोर होगा। परियोजना से भारत की परमाणु क्षमता और वैश्विक सहयोग मजबूत होगा।

BARC Andhra Pradesh new R&D campus
BARC Andhra Pradesh new R&D campus : भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने आंध्र प्रदेश में एक विशाल रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) कैंपस बनाने की योजना तैयार की है। यह परियोजना भारत के न्यूक्लियर साइंस और एडवांस रिएक्टर टेक्नोलॉजी को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। प्रस्तावित कैंपस अनकापल्ली जिले में लगभग 3,000 एकड़ में फैला होगा, जिसमें अनुसंधान, रिएक्टर डेवलपमेंट और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजीज का केंद्र स्थापित किया जाएगा।
परियोजना के लिए BARC ने आंध्र प्रदेश सरकार से 148.15 हेक्टेयर जंगल की जमीन उपयोग में लेने की अनुमति मांगी है। इस प्रस्ताव की समीक्षा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक्सपर्ट एप्रेजल कमेटी ने की और इसे “सैद्धांतिक मंजूरी” देने की सिफारिश की। अधिकारियों के अनुसार, BARC ने पहले ही 1,200 हेक्टेयर राजस्व भूमि परियोजना के लिए हासिल कर ली है। प्रस्तावित जंगल की जमीन पहले से प्राप्त भूमि से जुड़ी हुई है और पूरे कैंपस के लेआउट के लिए अहम है।
BARC का नया कैंपस स्वदेशी न्यूक्लियर इनोवेशन और क्लीन एनर्जी समाधानों पर केंद्रित होगा। इस महीने की शुरुआत में सरकार को संसद में बताया गया कि BARC ने पहले ही स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों का डिजाइन और विकास शुरू कर दिया है। इसमें 200 मेगावाट और 55 मेगावाट के स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर तथा हाइड्रोजन उत्पादन के लिए हाई-टेम्परेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर शामिल हैं। इन रिएक्टरों को आधिकारिक परमाणु ऊर्जा विभाग के साइट्स पर टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन के लिए विकसित किया जाएगा और परियोजना की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।
साथ ही, केंद्र सरकार ने परमाणु क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया है। भारत और रूस की रोसाटॉम के बीच बड़े और छोटे परमाणु पावर प्रोजेक्ट्स पर सहयोग की संभावना पर बातचीत हुई है, जिसमें रूस द्वारा डिजाइन किए गए स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों को भारत में स्थापित करने और उपकरण निर्माण को स्थानीय स्तर पर विकसित करने पर चर्चा शामिल है।
यह परियोजना न केवल भारत की परमाणु क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में यह कदम देश को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने में मददगार साबित होगा।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
