भारत ने ऑटोनॉमस वाहनों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रडार और V2X तकनीक के लिए नियमों को आसान बना दिया है। क्या यह बदलाव भारतीय सड़कों को दुनिया में सबसे सुरक्षित बना पाएगा? जानिए भविष्य की ड्राइविंग तकनीक से जुड़ी पूरी खबर।

सड़कों पर सुरक्षा की नई इबारत लिखने की दिशा में भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने आधुनिक वाहनों में उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणालियों के लिए नियमों को सरल बनाते हुए ऑटोनॉमस ड्राइविंग तकनीक के लिए द्वार खोल दिए हैं। सरकार ने ऑटोमोटिव रडार और कनेक्टेड वाहन तकनीकों में इस्तेमाल होने वाले विशिष्ट रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड के लिए लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को समाप्त कर दिया है, जिससे उद्योग जगत में उन्नत सुरक्षा फीचर्स को अपनाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

नवीनतम आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, 77GHz से 81GHz फ्रीक्वेंसी बैंड में काम करने वाले ऑटोमोटिव रडार सिस्टम को अब लाइसेंसिंग से छूट दी गई है। यह स्पेक्ट्रम उन रडार-आधारित कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है जो एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) को आधार प्रदान करते हैं। इनमें एडेप्टिव क्रूज़ कंट्रोल, ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग और ब्लाइंड-स्पॉट डिटेक्शन जैसी सुरक्षा सुविधाएँ शामिल हैं, जो भविष्य के स्वायत्त वाहनों के लिए अनिवार्य आधारभूत स्तंभ हैं।

इतना ही नहीं, सरकार ने व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) संचार के लिए उपयोग होने वाले 5.9GHz बैंड के लिए भी लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को हटा दिया है। यह तकनीक वाहनों और आसपास के बुनियादी ढांचे के बीच वास्तविक समय में डेटा के आदान-प्रदान को संभव बनाती है। इसके माध्यम से चालक अपनी दृष्टि सीमा से परे आने वाले खतरों के प्रति पहले से सचेत हो सकेंगे। उदाहरण के तौर पर, कार अब चालक को किसी अंधे मोड़ पर आगे अचानक ब्रेक लगने या एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन वाहन के आने की जानकारी समय रहते दे सकेगी।

इस नियामक बदलाव से भारत वैश्विक मानकों के अनुरूप हो गया है, जिसका पालन अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में किया जा रहा है। अब वाहन निर्माता बिना किसी विशेष बदलाव के वैश्विक स्तर पर विकसित रडार और संचार प्रणालियों को भारतीय बाज़ार में उतार सकेंगे, जिससे लागत में कमी आएगी और इन तकनीकों का प्रसार तेजी से होगा। मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसे लग्जरी ब्रांडों के साथ-साथ मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी घरेलू कंपनियां भी अब मास-मार्केट मॉडलों में ADAS फीचर्स को बढ़ा सकेंगी। बोश, कॉन्टिनेंटल और क्वालकॉम जैसे तकनीकी आपूर्तिकर्ताओं के लिए भी यह एक बड़ा अवसर है।

वर्ष 2024 में देश भर में दर्ज 1,77,000 से अधिक सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर सरकार इंटेलिजेंट वाहन तकनीकों को बढ़ावा देकर सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रयासरत है। हालांकि नए नियम इन प्रणालियों को अनिवार्य नहीं बनाते हैं, लेकिन ये एक प्रमुख नियामक बाधा को दूर कर भारत में सुरक्षित और कनेक्टेड मोबिलिटी के एक नए युग का सूत्रपात कर रहे हैं।

Pratahkal Newsroom

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