नासा का आर्टेमिस II रचेगा इतिहास; चाँद के उस हिस्से तक पहुँचेंगे जहाँ आज तक कोई नहीं गया
नासा का ऐतिहासिक मिशन चंद्रमा की उन गहराइयों तक पहुंचेगा जहां पहले कोई इंसान नहीं गया, ओरियन यान ने भेजी चंद्रमा के ग्रैंड कैन्यन की तस्वीरें।

मानव इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, नासा के ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन के अंतरिक्ष यात्री सोमवार को चंद्रमा के सुदूर हिस्से (Far Side) तक पहुंचने के लिए तैयार हैं। यह मिशन अंतरिक्ष की उन गहराइयों तक जा रहा है जहां आज तक कोई भी मानव नहीं पहुंच सका है। 1972 के अपोलो कार्यक्रम के समापन के बाद, आधी सदी से भी अधिक समय में चंद्रमा की ओर जाने वाले ये पहले अंतरिक्ष यात्री हैं, जो पृथ्वी से अधिकतम दूरी का रिकॉर्ड तोड़ने की ओर अग्रसर हैं।
पायलट विक्टर ग्लोवर ने पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलते समय अंतरिक्ष यान से रिपोर्ट दी कि पृथ्वी अब काफी छोटी दिखाई दे रही है और चंद्रमा का आकार लगातार बड़ा होता जा रहा है। चालक दल में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। मिशन के दौरान उन्होंने 'ओरिएंटल बेसिन' की तस्वीरें भी साझा की हैं, जिसे चंद्रमा का "ग्रैंड कैन्यन" कहा जाता है। अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने बताया कि इस अद्वितीय क्रेटर को अपनी आंखों से देखना उनके लिए एक गौरवपूर्ण क्षण था।
हालांकि यह मिशन वैज्ञानिक डेटा और शानदार तस्वीरें भेजने में सफल रहा है, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों को ओरियन कैप्सूल के शौचालय (लूनर लू) के साथ तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इंजीनियरों का मानना है कि यूरिन लाइन में बर्फ जमा होने के कारण यह समस्या आई है। मिशन कंट्रोल ने फिलहाल बैकअप बैग इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद, मिशन कमांडर रीड वाइजमैन ने बताया कि चालक दल का मनोबल काफी ऊंचा है। रविवार की सुबह उनकी शुरुआत कॉफी और प्रसिद्ध गानों के साथ हुई और मिशन कंट्रोल के माध्यम से वे अपने परिवारों से भी जुड़े रहे।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, मिशन का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव तब आएगा जब ओरियन यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र (Sphere of Influence) में प्रवेश करेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह से लगभग 4,000 मील की ऊंचाई से गुजरेंगे, जो उन्हें चंद्रमा के ध्रुवों और सुदूर हिस्सों का पूर्ण दृश्य प्रदान करेगा। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर एक स्थायी बेस स्थापित करने और 2028 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मानव लैंडिंग की नासा की महत्वाकांक्षी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Lalita Rajput
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