Intel का Apple के साथ साझेदारी पर बड़ा अपडेट ; जानें चिप बाजार में क्या होगा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि Apple और Intel अमेरिका में मिलकर चिप्स डिजाइन और निर्माण करने पर सहमत हुए हैं। यह संभावित साझेदारी Apple की सप्लाई चेन रणनीति, Intel की फाउंड्री महत्वाकांक्षाओं और अमेरिकी सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

Apple और Intel के बीच संभावित चिप निर्माण समझौता
अमेरिकी तकनीकी और सेमीकंडक्टर उद्योग में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 जून को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा करते हुए दावा किया कि दुनिया की सबसे मूल्यवान प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल Apple ने Intel के साथ मिलकर अमेरिका में चिप्स डिजाइन और निर्माण करने पर सहमति जताई है। यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और घरेलू विनिर्माण को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है।
ट्रंप की इस घोषणा को Apple की सेमीकंडक्टर रणनीति में संभावित बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह साझेदारी पूर्ण रूप से लागू होती है, तो यह न केवल Apple के लिए बल्कि Intel और पूरे अमेरिकी चिप उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple और Intel के बीच इस संभावित साझेदारी को लेकर पिछले एक वर्ष से अधिक समय से चर्चा चल रही थी। बताया जा रहा है कि वर्ष 2026 की शुरुआत में दोनों कंपनियों के बीच एक प्रारंभिक समझौता भी हुआ था, हालांकि अब तक किसी भी कंपनी ने इस समझौते की विस्तृत शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है।
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत Apple अपने स्वयं के चिप्स का डिजाइन तैयार करता रहेगा, जिनमें भविष्य की Apple Silicon श्रृंखला के प्रोसेसर भी शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर Intel अमेरिका स्थित अपनी विनिर्माण इकाइयों में इन चिप्स के उत्पादन की जिम्मेदारी संभाल सकता है। माना जा रहा है कि इसके लिए Intel की अत्याधुनिक फाउंड्री तकनीक और अगली पीढ़ी की निर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाएगा।
यह संभावित साझेदारी Apple के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कंपनी वर्तमान में अपने A-Series और M-Series चिप्स के निर्माण के लिए मुख्य रूप से ताइवान की कंपनी TSMC पर निर्भर है। TSMC दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी है, लेकिन उसकी अत्याधुनिक उत्पादन क्षमताओं पर इस समय AI उद्योग की बढ़ती मांग का भारी दबाव है। Nvidia और AMD जैसी कंपनियां भी TSMC की उन्नत उत्पादन लाइनों का व्यापक उपयोग कर रही हैं, जिसके चलते Apple वैकल्पिक उत्पादन क्षमता की तलाश में माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Intel के साथ साझेदारी Apple को अपनी विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने का अवसर दे सकती है। साथ ही यह कंपनी को भविष्य में किसी एक निर्माता पर अत्यधिक निर्भरता से भी बचा सकती है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों पर देश के भीतर उत्पादन बढ़ाने का दबाव बना रहा है, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल सके।
Intel के लिए यह समझौता और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कई वर्षों से Intel स्वयं को केवल चिप डिजाइन और निर्माण कंपनी के बजाय एक वैश्विक फाउंड्री सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। कंपनी का लक्ष्य TSMC जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती देना है। यदि Apple वास्तव में Intel की ग्राहक बनती है, तो यह Intel के लिए तकनीकी विश्वसनीयता और व्यावसायिक प्रतिष्ठा दोनों के लिहाज से बड़ी उपलब्धि होगी।
Apple जैसे वैश्विक ब्रांड को ग्राहक के रूप में हासिल करने से Intel को अरबों डॉलर के संभावित राजस्व का अवसर मिल सकता है। साथ ही यह कंपनी की उन्नत विनिर्माण तकनीकों पर उद्योग के भरोसे को भी मजबूत करेगा। ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद निवेशकों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और प्रीमार्केट ट्रेडिंग में Intel के शेयरों में लगभग 6.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। यह बढ़त ऐसे समय में आई है जब कंपनी के शेयर इस वर्ष अब तक लगभग तीन गुना तक बढ़ चुके हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक पूर्व रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि Apple और Intel के बीच कुछ चिप्स के निर्माण को लेकर प्रारंभिक समझौता हो चुका है। हालांकि ट्रंप की घोषणा के बाद भी Apple और Intel ने इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और दोनों कंपनियों ने मीडिया के सवालों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी।
ट्रंप ने इस घोषणा को अपने व्यापक सेमीकंडक्टर और औद्योगिक पुनर्निर्माण एजेंडे से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि पिछले कई दशकों में अमेरिका की महत्वपूर्ण चिप निर्माण क्षमता विदेशों में स्थानांतरित हो गई थी, जिसे अब वापस लाने की आवश्यकता है। इसी रणनीति के तहत प्रशासन घरेलू सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अरबों डॉलर के निवेश और प्रोत्साहन कार्यक्रमों पर जोर दे रहा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा Intel में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने और अमेरिकी तकनीकी कंपनियों को देश के भीतर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने की भी चर्चा रही है।
हालांकि इस संभावित समझौते को लेकर अभी कई महत्वपूर्ण प्रश्न अनुत्तरित हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि Intel आखिर Apple के कौन-से चिप्स का निर्माण करेगी। यह भी सामने नहीं आया है कि ये चिप्स iPhone, Mac, AI सर्वर या किसी अन्य उत्पाद के लिए उपयोग किए जाएंगे। इसके अलावा किस निर्माण प्रक्रिया का उपयोग होगा, बड़े पैमाने पर उत्पादन कब शुरू होगा और Apple अपने कुल चिप उत्पादन का कितना हिस्सा TSMC से हटाकर Intel को सौंपेगी, जैसे सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
फिर भी, यदि यह साझेदारी प्रस्तावित स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो इसे दशक के सबसे महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर समझौतों में गिना जा सकता है। यह Apple को एक दूसरा उन्नत विनिर्माण साझेदार प्रदान करेगी, Intel की फाउंड्री महत्वाकांक्षाओं को नई गति देगी, अमेरिकी सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी और महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। फिलहाल वैश्विक तकनीकी उद्योग की निगाहें Apple और Intel की ओर टिकी हुई हैं, जहां इस संभावित ऐतिहासिक साझेदारी की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
