दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ रफ्तार ने अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Apple ने अपने कई प्रमुख प्रोडक्ट्स की कीमतों में बड़ा इज़ाफा करने की घोषणा की है। कंपनी ने MacBook, iPad, HomePod, Apple TV और Vision Pro समेत कई प्रीमियम डिवाइसों के दाम बढ़ा दिए हैं। Apple का कहना है कि यह फैसला किसी अतिरिक्त मुनाफे या टैरिफ के कारण नहीं, बल्कि मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की कीमतों में आई अभूतपूर्व बढ़ोतरी की वजह से लिया गया है। इसे कंपनी के हाल के वर्षों का सबसे बड़ा मिड-साइकिल प्राइस रिवीजन माना जा रहा है।

Apple के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण DRAM (रैम) और NAND फ्लैश (स्टोरेज) चिप्स की वैश्विक कमी है। पिछले कुछ महीनों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ी है, जिसके चलते इन चिप्स की उपलब्धता पर भारी दबाव पड़ा है। Nvidia, OpenAI, Microsoft, Google और Amazon जैसी दिग्गज कंपनियां बड़े पैमाने पर AI डेटा सेंटर स्थापित कर रही हैं, जिनमें अत्याधुनिक मेमोरी चिप्स की भारी मात्रा में जरूरत पड़ रही है। इस बढ़ती मांग के कारण चिप निर्माता कंपनियों ने अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा AI उद्योग की ओर मोड़ दिया है, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए मेमोरी चिप्स की उपलब्धता कम हो गई है।

मार्केट रिसर्च फर्म TrendForce के मुताबिक, वर्ष 2026 की पहली तिमाही में DRAM की कीमतों में 98 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। इतना ही नहीं, दूसरी तिमाही में भी इनकी कीमतों में 58 से 63 प्रतिशत तक और वृद्धि होने का अनुमान है। उद्योग जगत ने इस अभूतपूर्व स्थिति को "RAMageddon" नाम दिया है, जो मेमोरी चिप बाजार में आए गंभीर संकट को दर्शाता है।

Apple ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कंपनी ने अब तक बढ़ती लागत का बोझ स्वयं उठाने की कोशिश की, लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि ग्राहकों तक इसका प्रभाव पहुंचाना अनिवार्य हो गया है। कंपनी के अनुसार, "हमने पहले कभी किसी कंपोनेंट की कीमतों में इतनी तेज़ और इतनी बड़ी बढ़ोतरी नहीं देखी। हमने अब तक अपने ग्राहकों को इससे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अब कीमतें बढ़ाना हमारी मजबूरी बन गई है।" कीमतों में बढ़ोतरी का असर Apple के कई प्रमुख उत्पादों पर दिखाई देगा। MacBook Neo की कीमत 599 डॉलर से बढ़ाकर 699 डॉलर कर दी गई है। MacBook Air (512GB) अब 1,099 डॉलर की बजाय 1,299 डॉलर में मिलेगा, जबकि MacBook Pro (1TB) की कीमत 1,699 डॉलर से बढ़ाकर 1,999 डॉलर कर दी गई है।

iPad श्रेणी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। iPad Air (128GB) की कीमत 599 डॉलर से बढ़ाकर 749 डॉलर कर दी गई है, जबकि बेस मॉडल iPad Pro अब 999 डॉलर के बजाय 1,199 डॉलर में उपलब्ध होगा। इनके अलावा HomePod, HomePod mini, Apple TV और Vision Pro जैसे अन्य Apple डिवाइस भी महंगे हो गए हैं। हालांकि, इन उत्पादों की कीमतों में वृद्धि मॉडल और स्टोरेज कॉन्फ़िगरेशन के अनुसार अलग-अलग होगी।

फिलहाल Apple ने iPhone की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेमोरी चिप्स की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो वर्ष के अंत तक iPhone भी महंगे हो सकते हैं। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि Apple ने पहले MacBook और iPad की कीमतें बढ़ाकर आगामी iPhone लॉन्च के दौरान नए फीचर्स पर ध्यान केंद्रित रखने की रणनीति अपनाई है।

भारत में भी Apple ने अपने कई उत्पादों की कीमतों में संशोधन किया है। 14-इंच MacBook Pro की कीमत अब लगभग 2,39,900 रुपये हो गई है, जो पहले की तुलना में करीब 70,000 रुपये अधिक है। वहीं MacBook Air (M5) की शुरुआती कीमत लगभग 1,49,900 रुपये कर दी गई है, जिसमें करीब 30,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। iPad Air की शुरुआती कीमत अब लगभग 89,900 रुपये से शुरू होगी।

Apple की इस घोषणा का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कंपनी के शेयरों में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि प्रतिस्पर्धी कंपनी Dell के शेयर भी 8 प्रतिशत से अधिक टूट गए। इससे निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ गई कि मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत का असर पूरे कंप्यूटर और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI क्रांति का प्रभाव अब सीधे आम उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। लैपटॉप और टैबलेट पहले की तुलना में महंगे हो रहे हैं और आने वाले समय में अन्य कंप्यूटर निर्माता कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं। यदि मेमोरी चिप्स का संकट बना रहता है तो स्मार्टफोन, विशेषकर iPhone, की कीमतों में भी वृद्धि संभव है। इसके साथ ही बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक स्तर पर स्मार्टफोन और पीसी की मांग में भी कमी आने की आशंका जताई जा रही है।

Apple ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला अधिक मुनाफा कमाने या किसी टैरिफ के कारण नहीं लिया गया है, बल्कि AI डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के चलते मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की ऐतिहासिक महंगाई इसकी मुख्य वजह है। फिलहाल MacBook, iPad और अन्य कई Apple डिवाइस महंगे हो चुके हैं, जबकि iPhone की कीमतें अभी स्थिर हैं। हालांकि यदि वैश्विक मेमोरी चिप संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो भविष्य में Apple के अन्य उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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