एंथ्रोपिक द्वारा सॉफ्टवेयर हैक करने की क्षमता रखने वाले 'मायथॉस-क्लास' मॉडल को आम यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने के संकेतों से वैश्विक साइबर सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं।

Anthropic Mythos Model : साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में इन दिनों एक ऐसा नाम गूंज रहा है, जिसने तकनीक के दिग्गजों से लेकर वैश्विक सरकारों तक की रातों की नींद उड़ा दी है। एंथ्रोपिक कंपनी का 'क्लाउड मायथॉस' (Claude Mythos) मॉडल, जिसे अब तक का सबसे खतरनाक और सक्षम एआई टूल माना जा रहा है, जल्द ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सकता है। यह महज एक साधारण चैटबॉट या भाषाई मॉडल नहीं है, बल्कि एक ऐसा डिजिटल हथियार है जो दुनिया के किसी भी सॉफ्टवेयर को पलक झपकते ही हैक करने की क्षमता रखता है। अपनी इन्हीं असीमित और विनाशकारी योग्यताओं के कारण इसे अब तक बेहद गोपनीय और सुरक्षित घेरे में रखा गया था, लेकिन टेक जगत से आ रहे हालिया संकेतों के मुताबिक, अब आम यूजर्स के लिए इसका इंतजार खत्म होने वाला है और अगले कुछ हफ्तों में यह सभी के लिए सुलभ हो सकता है।

इस बड़े तकनीकी बदलाव के संकेत खुद एंथ्रोपिक ने अपनी एक हालिया घोषणा के दौरान दिए। कंपनी ने जब अपने अपग्रेडेड 'क्लाउड ओपस 4.8' (Claude Opus 4.8) मॉडल को वैश्विक मंच पर उतारा, तब उसी आधिकारिक बयान में इस बात का जिक्र किया गया कि वे अब 'मायथॉस-क्लास' मॉडल को आम जनता के लिए लॉन्च करने की अंतिम तैयारियों में जुटे हैं। हालांकि, टेक विश्लेषकों के बीच अभी इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि क्या कंपनी मूल मायथॉस मॉडल को ही सबके लिए रोलआउट करेगी या फिर सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए इसका कोई संवर्धित और नियंत्रित संस्करण बाजार में पेश किया जाएगा।

अगर इस मॉडल की ताकतों की बात की जाए, तो इसके आंकड़े किसी को भी हैरत में डाल सकते हैं। एंथ्रोपिक के दावों के अनुसार, क्लाउड मायथॉस ने महज एक महीने के भीतर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सॉफ्टवेयर्स में साइबर सुरक्षा से जुड़ी दस हजार से अधिक गंभीर कमियों और खामियों (Vulnerabilities) का पता लगाया है। जिन चुनिंदा कंपनियों को इसकी टेस्टिंग का अधिकार मिला था, उनका कहना है कि मायथॉस के आने से साइबर खतरों और बग्स को ढूंढने की रफ्तार में दस गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रसिद्ध इंटरनेट होस्टिंग प्लेटफॉर्म क्लाउडफ्लेयर ने इस मॉडल की मदद से अपने क्रिटिकल-पाथ सिस्टम में दो हजार से ज्यादा सुरक्षा खामियां ढूंढीं, जिनमें से चार सौ बेहद उच्च और क्रिटिकल श्रेणी की थीं। इसी तरह, मोज़िला ने भी अपने फायरफॉक्स ब्राउज़र में 271 तकनीकी समस्याओं को इसी की मदद से खोजकर समय रहते फिक्स किया।

लेकिन जहां यह मॉडल सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर रहा है, वहीं इसके दुरुपयोग की आशंकाओं ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ा कानूनी और रणनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। एंथ्रोपिक ने खुद इस कड़वे सच को स्वीकार किया है कि वर्तमान में उसके या दुनिया की किसी भी अन्य टेक कंपनी के पास इस मॉडल के गलत इस्तेमाल को रोकने का कोई अचूक तरीका उपलब्ध नहीं है। अगर यह तकनीक गलत हाथों में चली गई, तो वैश्विक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह किया जा सकता है। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए भारत सहित दुनिया भर की सरकारें इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस बात की मांग उठ रही है कि ऐसी संप्रभु और शक्तिशाली तकनीकों तक सभी देशों की न्यायसंगत और सुरक्षित पहुंच (Fair Access) सुनिश्चित की जाए।

साइबर स्पेस के इस नए कुरुक्षेत्र में एंथ्रोपिक अकेली नहीं है। तकनीक की इस अंधी दौड़ में दबदबा बनाए रखने के लिए अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियां भी अपने सबसे घातक हथियारों के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। ओपनएआई (OpenAI) ने मायथॉस को सीधी चुनौती देने के लिए अपने 'डेब्रेक' (Daybreak) मॉडल को पेश किया है, तो दूसरी तरफ गूगल ने भी अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए 'एआई थ्रेट डिफेंस' (AI Threat Defense) मॉडल को बाजार में उतार दिया है। सिलिकॉन वैली की यह होड़ साफ दर्शाती है कि आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा की परिभाषा पूरी तरह बदलने वाली है, जहां जीत और हार का फैसला इंसानी सिपाही नहीं, बल्कि एआई के ये महाशक्तिशाली मॉडल्स करेंगे।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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