ऑस्ट्रेलियाई डेटा सेंटर कंपनी AirTrunk ने 2030 तक भारत में 30 अरब डॉलर से अधिक निवेश कर 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने की योजना घोषित की है। मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद में प्रस्तावित विस्तार, AI और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग को पूरा करेगा।

भारत तेजी से वैश्विक डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ऑस्ट्रेलिया की अग्रणी डेटा सेंटर कंपनी AirTrunk ने वर्ष 2030 तक भारत में 30 अरब डॉलर (करीब 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक) निवेश करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। यह निवेश न केवल भारत के डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े प्रस्तावित विदेशी निवेशों में से एक माना जा रहा है, बल्कि यह देश को वैश्विक AI और क्लाउड कंप्यूटिंग हब बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

AirTrunk एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे बड़ी हाइपरस्केल डेटा सेंटर कंपनियों में से एक है। कंपनी की स्थापना उद्यमी रॉबिन खुडा ने की थी और यह ऑस्ट्रेलिया तथा एशिया के विभिन्न देशों में प्रमुख क्लाउड सेवा प्रदाताओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट ग्राहकों को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराती है। कंपनी को वैश्विक निवेश दिग्गज ब्लैकस्टोन और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड का समर्थन प्राप्त है, जिससे इसकी वित्तीय और परिचालन क्षमता को और मजबूती मिलती है।

कंपनी की नई योजना के तहत भारत में वर्ष 2030 तक 5 गीगावाट (GW) से अधिक डेटा सेंटर क्षमता विकसित की जाएगी। वर्तमान में AirTrunk की भारतीय परियोजनाओं की क्षमता लगभग 600 मेगावाट (MW) है, जिसे आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर बढ़ाया जाएगा। विस्तार की यह रणनीति मुख्य रूप से मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख डिजिटल एवं प्रौद्योगिकी केंद्रों पर केंद्रित होगी, जहां क्लाउड सेवाओं, डेटा स्टोरेज और AI कंप्यूटिंग की मांग लगातार बढ़ रही है।



विशेषज्ञों के अनुसार, 5 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में भारत की कुल स्थापित डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.5 गीगावाट मानी जाती है। उद्योग अनुमानों के अनुसार वर्ष 2030 तक यह क्षमता 5 से 8 गीगावाट के बीच पहुंच सकती है। ऐसे में AirTrunk अकेले ही 5 गीगावाट से अधिक क्षमता जोड़ने की योजना बना रहा है, जो इस परियोजना के विशाल पैमाने को दर्शाता है। 5 गीगावाट यानी 5,000 मेगावाट की कंप्यूटिंग क्षमता हजारों AI प्रशिक्षण क्लस्टर्स, क्लाउड सेवाओं और एंटरप्राइज वर्कलोड को संभालने में सक्षम होगी। इससे भारत दुनिया के प्रमुख AI इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रों की सूची में शामिल हो सकता है।

इस महत्वाकांक्षी योजना की पहली बड़ी कड़ी महाराष्ट्र में प्रस्तावित विशाल डेटा सेंटर परियोजना है। हाल ही में AirTrunk ने मुंबई के निकट रायगढ़-पेन ग्रोथ सेंटर में 21.05 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। यह परियोजना 3 गीगावाट क्षमता वाले एक विशाल डेटा सेंटर परिसर के रूप में विकसित की जाएगी। रायगढ़ जिले में स्थापित होने वाली यह सुविधा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कंप्यूटिंग, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाइपरस्केल डेटा सेवाओं के लिए समर्पित होगी। यह अकेली परियोजना AirTrunk की कुल प्रस्तावित भारतीय क्षमता का बड़ा हिस्सा होगी।

भारत में AirTrunk की एंट्री भी हाल ही में हुई है। अप्रैल 2026 में कंपनी ने भारतीय डेटा सेंटर डेवलपर Lumina CloudInfra का अधिग्रहण कर भारतीय बाजार में प्रवेश किया था। इस अधिग्रहण से AirTrunk को तैयार परियोजनाओं, भूमि संसाधनों और स्थानीय विशेषज्ञता तक तत्काल पहुंच मिली, जिससे कंपनी को भारत में तेजी से विस्तार करने का आधार प्राप्त हुआ।

AirTrunk के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रॉबिन खुडा के अनुसार, भारत कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक बाजारों में से एक बन चुका है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं। देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में तेजी से वृद्धि हो रही है और AI मॉडल्स को प्रशिक्षित करने तथा संचालित करने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग शक्ति और स्टोरेज की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही भारतीय कंपनियां तेजी से क्लाउड प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही हैं, जबकि वैश्विक तकनीकी कंपनियों को भी स्थानीय डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता महसूस हो रही है।

सरकार द्वारा डेटा सेंटर उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न नीतिगत समर्थन और कर लाभ भी प्रदान किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त डेटा लोकलाइजेशन की बढ़ती आवश्यकता ने घरेलू डेटा सेंटरों की मांग को और बढ़ा दिया है। अब अधिक से अधिक कंपनियां चाहती हैं कि उनका डेटा भारत के भीतर ही प्रोसेस और स्टोर किया जाए, जिससे बड़े पैमाने पर नए डेटा सेंटरों की जरूरत पैदा हो रही है।

यदि AirTrunk अपनी घोषित योजना को सफलतापूर्वक लागू कर पाता है, तो इसका प्रभाव केवल डेटा सेंटर उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। यह निवेश हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है, वैश्विक AI और क्लाउड कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित कर सकता है तथा देश की डिजिटल अवसंरचना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। इसके साथ ही भारत की विदेशी कंप्यूटिंग संसाधनों पर निर्भरता कम होगी और देश वैश्विक AI अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच सकता है।

दुनिया भर में चल रही AI इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रतिस्पर्धा के बीच AirTrunk का यह 30 अरब डॉलर का निवेश भारत के लिए एक बड़े भरोसे का संकेत माना जा रहा है। यह घोषणा दर्शाती है कि वैश्विक निवेशक अब भारत को केवल एक विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नवाचारों के प्रमुख केंद्र के रूप में देख रहे हैं। यदि यह परियोजना निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी होती है, तो यह आने वाले वर्षों में भारत के तकनीकी विकास और डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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