AI adoption in Indian enterprises : भारत की कॉरपोरेट दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अब तक के सबसे ऊंचे आत्मविश्वास के दौर से गुजर रही है। एक ताज़ा वैश्विक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में 93 प्रतिशत कंपनियों को अगले तीन वर्षों में अपने एआई निवेश से स्पष्ट रूप से सकारात्मक रिटर्न मिलने की उम्मीद है। यह आंकड़ा सर्वे में शामिल सभी देशों में सबसे अधिक है, जो भारत को एआई अपनाने के मामले में अग्रणी साबित करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष भारतीय कंपनियों ने औसतन 31 मिलियन डॉलर का निवेश एआई परियोजनाओं में किया है, जो वैश्विक औसत 26.7 मिलियन डॉलर से कहीं अधिक है। यह बढ़ा हुआ निवेश इस बात का संकेत है कि भारतीय उद्योग जगत न केवल एआई को भविष्य की अनिवार्यता मान रहा है, बल्कि उसे वास्तविक लाभ का स्रोत भी समझ रहा है।

जर्मन सॉफ्टवेयर दिग्गज एसएपी की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कंपनियों को 2025 तक अपने एआई निवेश से औसतन 15 प्रतिशत रिटर्न की उम्मीद है। वहीं, आगामी दो वर्षों में यह रिटर्न दोगुना बढ़कर 31 प्रतिशत तक पहुंचने का आकलन किया गया है। कंपनियों का विशेष जोर सॉफ्टवेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई टैलेंट और कंसल्टिंग पर बना हुआ है।

रिपोर्ट बताती है कि आने वाले दो वर्षों में संगठनों द्वारा एआई निवेश में 33 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है, जो इस वर्ष देखे गए रिटर्न को और मजबूत बनाएगी। एसएपी के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर फिलिप हर्जिग ने कहा कि एआई अब केवल ऑटोमेशन का उपकरण नहीं रहा, बल्कि कंपनियों को मिशन-क्रिटिकल प्रक्रियाओं में तेज़ और सूझबूझ से भरे निर्णय लेने में सक्षम बना रहा है।

सर्वे में शामिल 56 प्रतिशत भारतीय कंपनियों ने कहा कि वे वर्तमान एआई रिटर्न से संतुष्ट हैं। वहीं 58 प्रतिशत को विश्वास है कि एआई किसी भी अन्य तकनीकी निवेश की तुलना में तेज़ और बेहतर रिटर्न दे सकता है। एसएपी लैब्स इंडिया की एमडी सिंधु गंगाधरन ने इस संदर्भ में कहा कि भारत वैश्विक एआई टैलेंट पूल में 16 प्रतिशत योगदान देता है, जो इसे एक 'ट्रू एआई पावरहाउस' बनाता है।

उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल टैलेंट का तेजी से बढ़ता आधार कंपनियों को एआई को केवल पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित रखने के बजाय निर्णय-प्रक्रियाओं, संचालन और ग्राहक अनुभव के मुख्य ढांचे में शामिल करने में मदद कर रहा है। यह रिपोर्ट कुल आठ देशों के 1600 वरिष्ठ कॉरपोरेट नेताओं के सर्वे पर आधारित है, जिसमें से 200 प्रतिभागी भारत से थे।

भारत में एआई निवेश की यह गति और उद्योगों का बढ़ता विश्वास यह दर्शाता है कि अगले दशक में देश न केवल एआई उपयोग में अग्रणी होगा, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी नेतृत्व की दौड़ में भी मजबूत दावेदार साबित हो सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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